विश्व पानी दिवस २००८ पर विशेष - दुनिया में जिन लोगों को साफ पानी नही नसीब होता है, उनकी संख्या आधी करने के लिए अमरीकी डालर ८० बिलयुन कहा से आएगा?

विश्व पानी दिवस २००८ पर विशेष

दुनिया में जिन लोगों को साफ पानी नही नसीब होता है, उनकी संख्या आधी करने के लिए अमरीकी डालर ८० बिलयुन कहा से आएगा?


मिल्लेन्नियम देवेलोप्मेंट गोल (MDG) के अनुसार २०१५ तक जिन लोगों को साफ पानी और स्वच्छ रहन सहननसीब नही है उनकी संख्या आधी हो जानी चाहिए.

२६० करोड़ लोगों को साफ पानी और स्वच्छ रहन सहन नसीब नही है. ये संख्या आधी करने के लिए विश्व स्तर पर८० बिलिओन अमरीकी डालर कहा से आयेंगे?

और ८० बिलिओन अमरीकी दल्लर अगर मिल भी जायेंगे तो २०१५ तक सिर्फ़ २६० करोड़ में से १३० करोड़ लोगों कोसाफ पानी और स्वच्छ रहन सहन नसीब होगा और बाकि के आधे १३० करोड़ लोग बिना साफ पानी और स्वच्छता के साथ जी रहे होंगे.

ये जो ८० बिलिओन अमरीकी डालर की रकम है ये विश्व में सैन्य व्यवस्था पर खर्च होने वाली रकम कीमात्र १ प्रतिशत है.

ये जो ८० बिलिओन अमरीकी डालर की रकम है ये बोतल बंद पानी की निजी कंपनियों के मुनाफे का सिर्फ़ १/३हिस्सा है.

ये जो ८० बिलिओन अमरीकी डालर की रकम है ये यूरोप में आइस-क्रीम पर हर साल खर्च हो जाती है.

"जिन निजी कंपनियों ने विशेषकर कि बोतलबंद पानी की निजी कंपनियों ने पर्यावरण को नुकसानपहुचाया है और स्थानिये लोगों के प्राकृतिक संसाधन पर अधिकार को मारा है, उनसे ही इस रकम कोउसूलना चाहिए, कि गरीब देशों की सरकारों से या अन्य जन-संसाधनों से" कहना है डॉ संदीप पाण्डेय का जो जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समंवाए (NAPM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

जो बोतलबंद पानी की निजी कम्पनियाँ स्थानिये लोगों की जमीन के नीचे से पानी निकाल कर बाज़ार में बेच के मुनाफा कमा रही हैं, इस मुनाफे का १/३ हिस्से से १३० करोड़ लोगों को स्वच्छ पानी और रहन सहन नसीब हो पायेगा. पानी कोई बजारू वस्तु नही है जो बाज़ार में बेची जा सके. पानी के ऊपर निजी कंपनियों के नियंतरण या कंट्रोल पर अंकुश लगना चाहिए.

"एन कंपनियों की वजह से ही विश्व में पानी की त्राहि त्राहि मची है और ये कम्पनियाँ इससे मुनाफा भी कमाती है" कहना है कथ्य मुल्वेय का जो कार्पोरेट अच्कोउन्ताबिलिटी इंटरनेशनल की अध्यक्ष हैं.

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