अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू अधिवेशन दवाई-कंपनी के हाथो बिका

अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू अधिवेशन दवाई-कंपनी के हाथो बिका
जॉन पोलितो

(ये मौलिक लेख जॉन र पोलितो द्वार अंग्रेज़ी में लिखा गया है, और इसके एक अंश का हिन्दी अनुवाद करने का प्रयास किया गया है. पूरा मौलिक अंग्रेज़ी लेख पढने के लिए यह क्लिक्क करें:

अनुवाद में त्रुटियों के लिए छमा करें)

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बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेस्सर मिचेल सिएगेल ने १४वें अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू या स्वास्थ्य अधिवेशन (14th World Conference on Tobacco or Health) ने कहाकी विश्व स्तर पर चल रहे तम्बाकू नियांतरण के प्रयास को अधिवेशन ने दवाई कंपनियों के हाथों बेच दिया है.

ये अधिवेशन बोम्बे/ मुम्बई में होने को है - मार्च २००९ में. इसकी वेबसाइट ये दिखाती है कि दुनिया की बड़ी दवाईकम्पनियाँ प्फिजेर (pfizer) और ग्लाक्सोस्मिथ्क्लिने या glaxosmithkline जो तम्बाकू छोड़ने के लिए अनेकोंदवाई बनती हैं, वो इसकी प्रयाजोक हैं.

"इस अधिवेशन में कैसे कोई स्वतंत्र रूप से तम्बाकू नशा छुड़वाने के लिए दवैयाँ किस हद तक प्रभावकारी हैं, इस पर खुले रूप से चर्चा कैसे हो सकती है जब दो बड़ी दवाई कम्पनियाँ इस अधिवेशन की प्रमुख प्रायोजक-करता हैं?" पूछते हैं डॉ सिएगेल. डॉ सिएगेल तम्बाकू नियांतरण में पिछले २० साल से कार्यरतरहे हैं.

"खुले रूप से तम्बाकू नशा उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय नीतियों पर कैसे बहस हो सकती है, जब दो बड़ी दवाई कम्पनियाँ जिनके उत्पादन तम्बाकू छुड़वाने का दावा करते हैं, इस अधिवेशन की प्रमुख प्रायोजक-करता हैं?" पूछते हैं डॉ सिएगेल.

अब ये लोगों को पता चल चुका है की तम्बाकू छुड़वाने की दवाइयों के क्लीनिकल ट्रायल शोध के दौरान जो सफलहोने का दावा करतें हैं, वो सही मायनों में सच नही है क्योकि इस ट्रायल में आधे लोगों को बिना शोध-रत दवाई जोदी गई थी, वो खुली बात थी की असरकारी नही है. इस

हर तम्बाकू छुड़वाने की दवाई असल जीवन में बुरी तरह से निष्फल रही है, ये खुला सत्य है.

"ये दवैयाँ इसलिए FDA से पारित हो गयीं क्योकि ट्रायल में ये पाया गया की ये 'प्लासबो' से अधिक असरकारी हैं" कहना है डॉ एडवर्ड लेविन का, सो दुके यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, रलिघ में कार्यरत हैं.

१९८४ से USA के FDA को पता था की दवाइयों का 'प्लासबो' से बेहतर होना, कोई ठोस आधार नही है की दवाईकारगर हो.

ट्रायल में, ये पता करने के लिए की शोधरत दावा कारगर है, आधे प्रतिभागियों को शोध-रत दावा दी जाती है औरबाकि आधे को शोध-रत दावा जैसे लगने वाला 'प्लासबो' जिसमे दावा का अंश नही होता. दोनों भागों की तुलना सेही पता चल सकता है कि शोध-रत दावा कारगर है या नही.

पूरा लेख पढने के लिए यह क्लिक्क करें
अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू अधिवेशन दवाई-कंपनी के हाथो बिका
जॉन पोलितो

(ये मौलिक लेख जॉन र पोलितो द्वार अंग्रेज़ी में लिखा गया है, और इसके एक अंश का हिन्दी अनुवाद करने का प्रयास किया गया है. पूरा मौलिक अंग्रेज़ी लेख पढने के लिए यह क्लिक्क करें:

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बोस्टन विश्वविद्यालय के प्रोफेस्सर मिचेलसिएगेल ने १४वें अन्तर-राष्ट्रीय तम्बाकू या स्वास्थ्य अधिवेशन (14th World Conference on Tobacco or Health) नेकहा की विश्व स्तर पर चल रहे तम्बाकूनियांतरण के प्रयास को अधिवेशन ने दवाई कंपनियों के हाथों बेच दिया है.

ये अधिवेशन बोम्बे/ मुम्बई में होने को है - मार्च २००९ में. इसकी वेबसाइट ये दिखाती है कि दुनिया की बड़ी दवाईकम्पनियाँ प्फिजेर (pfizer) और ग्लाक्सोस्मिथ्क्लिने या glaxosmithkline जो तम्बाकू छोड़ने के लिए अनेकोंदवाई बनती हैं, वो इसकी प्रयाजोक हैं.

"इस अधिवेशन में कैसे कोई स्वतंत्र रूप से तम्बाकू नशा छुड़वाने के लिए दवैयाँ किस हद तक प्रभावकारी हैं, इस पर खुले रूप से चर्चा कैसे हो सकती है जब दो बड़ी दवाई कम्पनियाँ इस अधिवेशन की प्रमुख प्रायोजक-करता हैं?" पूछते हैं डॉ सिएगेल. डॉ सिएगेल तम्बाकू नियांतरण में पिछले २० साल से कार्यरतरहे हैं.

"खुले रूप से तम्बाकू नशा उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय नीतियों पर कैसे बहस हो सकती है, जब दो बड़ी दवाई कम्पनियाँ जिनके उत्पादन तम्बाकू छुड़वाने का दावा करते हैं, इस अधिवेशन की प्रमुख प्रायोजक-करता हैं?" पूछते हैं डॉ सिएगेल.

अब ये लोगों को पता चल चुका है की तम्बाकू छुड़वाने की दवाइयों के क्लीनिकल ट्रायल शोध के दौरान जो सफलहोने का दावा करतें हैं, वो सही मायनों में सच नही है क्योकि इस ट्रायल में आधे लोगों को बिना शोध-रत दवाई जोदी गई थी, वो खुली बात थी की असरकारी नही है. इस

हर तम्बाकू छुड़वाने की दवाई असल जीवन में बुरी तरह से निष्फल रही है, ये खुला सत्य है.

"ये दवैयाँ इसलिए FDA से पारित हो गयीं क्योकि ट्रायल में ये पाया गया की ये 'प्लासबो' से अधिक असरकारी हैं" कहना है डॉ एडवर्ड लेविन का, सो दुके यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर, रलिघ में कार्यरत हैं.

१९८४ से USA के FDA को पता था की दवाइयों का 'प्लासबो' से बेहतर होना, कोई ठोस आधार नही है की दवाईकारगर हो.

ट्रायल में, ये पता करने के लिए की शोधरत दावा कारगर है, आधे प्रतिभागियों को शोध-रत दावा दी जाती है औरबाकि आधे को शोध-रत दावा जैसे लगने वाला 'प्लासबो' जिसमे दावा का अंश नही होता. दोनों भागों की तुलना सेही पता चल सकता है कि शोध-रत दावा कारगर है या नही.

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