तपेदिक या टीबी समाचार सारांश: २४ जून २००८: अंक ६३

तपेदिक या टीबी समाचार सारांश
अंक ६३
मंगलवार, २४ जून २००८
************************

जर्मनी ने डेब्ट-टू-हैल्थ समझौते के तहत इंडोनेशिया का ५० मिलियन यूरो का कर्जा माफ़ कर दिया. शर्त यह है कि इस रकम का ५० प्रतिशत धनराशि इंडोनेशिया जन-स्वास्थ्य के कार्यक्रमों को सशक्त करने में निवेश करेगा.

यह एक सराहनीय प्रयास है क्योंकि कई विकासशील देश कर्जे के कारण जन-स्वास्थ्य और विकास के कार्यक्रमों पर अपेक्षा के अनुरूप निवेश नही कर पा रहे हैं. उदाहरण के तौर पर अफ्रीका के घाना देश में जितना पैसा जन-स्वास्थ्य के कार्यक्रम पर व्यय होता है, उसका ८ गुणा अधिक विश्व बैंक के क़र्ज़ को लौटाने में जाता है. अन्य दाता एजेन्सी से अनुरोध है कि जर्मनी के इस उदाहरण से प्रेरित हो कर विकासशील देशों में जन-स्वास्थ्य और विकास से जुड़े हुए कार्यक्रमों में निवेश को प्रोत्साहन दें, और कर्जे को माँफ करें.

पाकिस्तान में टीबी या तपेदिक से सम्बंधित जागरूकता में कमी है - ऐसा मानना है वहा पर कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं का. जब तक आम लोगों में तपेदिक या टीबी के प्रारम्भिक लक्षणों के बारे में जागरूकता नही होगी, टीबी या तपेदिक से सम्बंधित शोषण कम नही होगा, टीबी या तपेदिक की जाँच के लिए कहाँ पर जाना चाहिए इसके बारे में जागरूकता नही बढ़ेगी, टीबी या तपेदिक के इलाज से सम्बंधित जानकारी नही मिलेगी इत्यादि, तब तक टीबी या तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम कैसे सुधरेंगे?

तपेदिक या टीबी के प्रभावकारी इलाज उपलब्ध होने के बावजूद रोजाना ४,००० से अधिक लोग तपेदिक या टीबी की वजह से मृत्यु के शिकार होते हैं. टीबी या तपेदिक से एक भी व्यक्ति की मृत्यु नही होनी चाहिए क्योंकि इलाज मुमकिन है, कहना है संयुक्त राष्ट्र की महा सचिव बन-की-मून का. बन-की-मून ने यह भी कहा कि नई टीबी की जाँच और दवाइयों के लिए शोध पर पर्याप्त आर्थिक निवेश नही किया गया है. बन-की-मून का यह भी कहना है कि एच.आई.वी से ग्रसित लोगों में टीबी या तपेदिक की जाँच और इलाज करने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है, जिसके लिए पर्याप्त आर्थिक निवेश भी उपलब्ध कराना चाहिए.

No comments: