जापान टोबक्को इंटरनेशनल (जे.टी.आई) कंपनी भारत में अपनी सिगरेट बेचने के लिए आतुर

जापान टोबक्को इंटरनेशनल (जे.टी.आई) कंपनी भारत में अपनी सिगरेट बेचने के लिए आतुर

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी तम्बाकू कंपनी, जापान टोबक्को इंटरनेशनल (जे.टी.आई), अब भारत में अपनी सिगरेट ब्रांड बेचने के लिए भारत सरकार से विदेशी सीधे निवेश के लिए बात चीत प्रारम्भ कर रही है.

जे.टी.आई ने जब आर.जे रेय्नोल्ड कंपनी खरीद ली थी, तब चूँकि आर.जे रेय्नोल्ड कंपनी का ५०:५० प्रतिशत का दिल्ली-स्थित मोदी कंपनी से व्यापारिक समझौता था, इसलिए जे.टी.आई को भारत में मोदी कंपनी के साथ ५० प्रतिशत की भागीदारी मिल गई थी.

आब, विदेशी सीधे निवेश या फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट के माध्यम से, जे.टी.आई ने भारत सरकार के फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड को यह अर्जी दी है कि उसका शेयर ५० प्रतिशत से बढ़ा कर ७४ प्रतिशत कर दिया जाए.

इसके पहले भारत में फिलिप मोरिस, ब्रिटिश अमेरिकन टोबक्को और रोथ्मांस आदि को भारत सरकार ने देश में इनकी फैक्ट्री स्थापित कर के सिगरेट बेचने की अनुमति नही दी थी. हालाँकि १९९७ में फिलिप मोरिस को खाद्य उत्पादन बेचने की अनुमति मिल गई थी (परन्तु सिगरेट फैक्ट्री लगाने की अनुमति रद्द कर दी गई थी)।
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तम्बाकूकिल्स
समाचार बुलेटिन
शुक्रवार, ४ जुलाई २००८
अंक
४१२

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