विटामिन 'ए' से बच्चों का मृत्युदर २० प्रतिशत कम हो सकता है

विटामिन 'ए' से बच्चों का मृत्युदर २० प्रतिशत कम हो सकता है

नवजात शिशुओं को और बच्चों को विटामिन 'ए' की खुराक देने से उनमें मृत्यु दर २० प्रतिशत से भी अधिक कम हो सकता है, कहना है हॉवर्ड बी शिफ्फेर का, जो विटामिन-अन्जेल नामक अंतर्राष्ट्रीय समूह के संस्थापक-अध्यक्ष हैं. हॉवर्ड, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की विधान सभा से २५ किलोमीटर दूर एक ग्रामीण छेत्र में लोगों के साथ स्वास्थ्य जागरूकता शिविर में अपनी बात रख रहे थे - परन्तु उत्तर प्रदेश की विधान सभा में बैठे हुए राजनीतिज्ञों को इस बात का अनुमान है कि नहीं, कि विटामिन 'ए' की खुराक से बच्चों का मृत्यु दर २० प्रतिशत से भी अधिक कम हो सकता है, पता नहीं!

विटामिन 'ए' की कमी से सबसे अधिक कु-प्रभाव बचपन में पड़ता है और यह विटामिन 'ए' की कमी ही बच्चों में बीमारियों और मृत्यु तक का एक बड़ा कारण है. बच्चों में अंधापन होना या आंखों की देखने की छमता का ख़तम हो जाना विटामिन 'ए' की कमी का सबसे बड़ा लक्षण है. विटामिन 'ए' शरीर की प्रतिरोधकता के लिए भी आवश्यक है. इसीलिए अक्सर यह बच्चे जिनमें विटामिन की कमी होती है, वोह या तो अंधापन का शिकार हो जाते हैं या फिर उससे पहले ही प्रतिरोधक छमता के कम होने की वजह से संक्रामक रोगों का शिकार हो जातें हैं जैसे की मीसेल्स, दस्त या मलेरिया, कहा अरुल्मोनी ने, जो बेलिवेर्स चर्च के अध्यक्ष हैं.

विटामिन अन्जेल ने जब खासकर कि बच्चों को विटामिन 'ए' की खुराक देने का और इससे सम्बंधित जागरूकता बढ़ाने का कार्य शुरू किया था, तब यह विश्व स्तर पर ज्ञात नहीं था कि विटामिन 'ए' की खुराक से बच्चों के मृत्यु दर में इतनी भारी गिरावट सकती है (२० प्रतिशत से भी अधिक). विटामिन 'ए' को ले कर के अंतर्राष्ट्रीय मत कोपेनहागेन कंसेन्सस से बना.

कोपेनहागेन कंसेन्सस २००८ में, विश्व के ५० अर्थ-शास्त्री, वैज्ञानिक, और अन्य विशेषज्ञ जिनमें नोबेल पुरुस्कार विजेता भी शामिल थे, ने सालों के अध्ययन का सार रखा जिसमें उन्होंने विश्व के समक्ष सब चुनौतियों पर गौर किया था और ३० सबसे प्रमुख चुनौतियों की सूंची बनाई जिससे कि सरकारों और गैर-सरकारी संगठन इन प्राथमिकताओं पर कार्य कर सकें और बदलाव ला सकें.

इस कोपेनहागेन कंसेन्सस २००८ के अनुसार कु-पोषणता सबसे बड़ी चुनौती है. विश्व में १४ करोड़ बच्चें हैं जो कु-पोषित हैं. इनमें से ८० प्रतिशत को पोषणता प्रदान करने में मात्र अमरीकी डालर करोड़ प्रति वर्ष का व्यय आएगा और इस व्यय से सालों तक का लाभ मिलेगा - क्योंकि बच्चे स्वस्थ रहेंगे, उनकी मृत्यु दर २० प्रतिशत से भी अधिक गिर जाएगा, अंधापन के दर में भारी गिरावट आएगी, मंद-बुद्धि बच्चों के दर में भी गिरावट आएगी और अन्य लाभ भी मिलेंगे जो यह स्वस्थ बच्चे अपने-अपने देशों की अर्थव्यवस्था को देंगे. इस शोध के अनुसार यह करोड़ का आर्थिक व्यय कम-से-कम १०० करोड़ का फायदा कराएगा. हर एक अमरीकी डालर के व्यय पर १७ अमरीकी डालर का लाभ मिलेगा.


विटामिन अन्जेल इस पृथ्वी से विटामिन 'ए' की कमी से होने वाले अंधापन को वर्ष २०२० तक समाप्त करना चाहती है - इसी अभियान को ऑपरेशन २०/२० कहते हैं.

विटामिन 'ए' की गोलियों के साथ-साथ बच्चों को पेट के कीड़े मारने वाली दावा भी दी जा रही है क्योंकि पेट में कीड़े होने से विटामिन 'ए' की खुराक बच्चों के शरीर में नहीं लगती है, कहना है हॉवर्ड शिफ्फेर का.

[सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सी.एन.एस]

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