अनेक संगठनों ने आज आंध्र प्रदेश में टीबी नियंत्रण से संबन्धित समस्याओं को चिन्हित किया और अधिकारियों को ज्ञापन दिया गया जिससे कि प्रदेश में टीबी नियंत्रण में व्यापक सुधार हो सकें। पार्टनर्शिप फॉर टीबी केअर एंड कंट्रोल इन इंडिया, लेपरा सोसाइटी, कैथॉलिक हेल्थ असोसियशन ऑफ इंडिया, सीबीसीआई-सीएआरडी, डैमियन फ़ाउंडेशन, डेविड एंड लोइस रीस अस्पताल, शिवानंद पुनर्वास केंद्र, टीबी अलर्ट इंडिया, वासव्य महिला मंडली, वर्ल्ड विज़न इंडिया, सीएएमपी, और रायलसीमा ग्रामीण विकास सोसाइटी आदि संस्थाओं ने अधिकारियों को ज्ञापन दिया।
टीबी वैक्सीन शोध असफल: हमारे लिए क्या मायने हैं?
आखिर क्या वजह है कि टूबेर्कुलोसिस (टीबी) नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना हुआ है? टीबी से बचाव के लिए जो एकमात्र टीका उपलब्ध है उसे बीसीजी कहते हैं। बीसीजी लगभग 100 साल पुराना टीका है, और आज भी विशेषकर कि बच्चों को वीभत्स प्रकार की टीबी से बचाता है। बेहतर और अधिक प्रभावकारी टीबी टीके के शोध अनेक साल से चल रहे हैं और 4 फरवरी 2013 को ऐसे ही एक टीबी वैक्सीन शोध जिसे 'एमवीए85ए' कहते हैं, के नतीजे 'द लैनसेट' में प्रकाशित हुए हैं।एक-तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है: प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) के अनुसार कम-से-कम एक-तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है। डबल्यूएचओ अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित और कैरिएर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के प्रिन्सिपल प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि “कैंसर से बचाव और कैंसर के खतरे को कम करने वाली जीवनशैली को बढ़ावा देने से ही कैंसर नियंत्रण में सार्थक कदम उठ सकते हैं”। प्रो0 डॉ0 रमा कान्त, जो किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी के पूर्व प्रमुख और पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक भी रहे हैं, विश्व कैंसर दिवस पर स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, सीएनएस, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय द्वारा आयोजित मीडिया संवाद को संबोधित कर रहे थे।
राष्ट्रपति महिला हिंसा ऑर्डिनेन्स पर हस्ताक्षर न करें: महिला आंदोलन
अनेक महिला अधिकारों के लिए समर्पित सामाजिक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यौन हिंसा से संबन्धित मामलों में क्रिमिनल विधि संशोधन के लिए ‘सरकार द्वारा ऑर्डिनेन्स’ लाने के निर्णय का पुरजोर विरोध किया। लखनऊ में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति धुरु ने कहा कि माननीय राष्ट्रपति से हमारी अपील है कि वें इस ‘ऑर्डिनेन्स’ पर हस्ताक्षर न करें। अरुंधति धुरु, जो भोजन अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त आयुक्त की प्रदेश सलाहकार हैं, ने कहा कि मीडिया द्वारा सार्वजनिक हुई जानकारी से यह पता चलता है कि यौन हिंसा कानून में संशोधनों से संबन्धित ऑर्डिनेन्स को कैबिनेट ने कल (1 फरवरी 2013) पारित किया है – अगले संसद सत्र आरंभ होने से 20 दिन पहले। सरकार द्वारा इस ऑर्डिनेन्स को बिना किसी पारदर्शिता के आकस्मिक रूप से पारित करने पर हम सभी अचंभित हैं। इस प्रकार की जल्दबाज़ी से ऑर्डिनेन्स को पारित करने की क्या आवश्यकता और उद्देश्य है जब कि अगला संसद सत्र 20 दिन बाद ही आरंभ होने को है और यह प्रस्तावित ऑर्डिनेन्स दिल्ली समूहिक बलात्कार के मामले मे लागू नहीं होगा।
सूचना का अधिकार अधिनियम और छात्रों के अनुभव
हमने
16 जनवरी,
2013 से
एक सर्वेक्षण शुरु किया जिसके
द्वारा हम उत्तर प्रदेश में
सूचना का अधिकार अधिनियम,
2005 के
कार्यान्वयन की स्थिति आवेदकों
के अनुभवों के आधार पर समझना
चाहते थे। यह
सर्वेक्षण करना हमारे लिये
बहुत शिक्षाप्रद अनुभव था
क्योंकि इससे हमें सूचना का
अधिकार अधिनियम को प्रयोग
में लाने से सम्बन्धित कठिनाइयों
के बारे में पता चला। हमने न
केवल अधिनियम के तहत आवेदन
देने का कागज़ी काम किया,
बल्कि
अन्य आवेदकों की शिकायतों को
सुना और उनके सम्भावित समाधानों
पर उनसे चर्चा की।
'दक्षिण-एशिया के समाचार पत्रों के प्रथम-पृष्ठ का जेंडर मूल्यांकन' रिपोर्ट जारी
[English] ‘दक्षिण-एशिया के समाचार पत्रों के प्रथम-पृष्ठ का जेंडर मूल्यांकन’ रिपोर्ट को स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, और सिटिज़न न्यूज़ सर्विस – सीएनएस ने लखनऊ में जारी किया। यह रिपोर्ट दक्षिण-एशिया के पाँच देशों (भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्री लंका) के मुख्य अँग्रेजी समाचार पत्रों के एक माह के अंकों के प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित समाचारों के जेंडर मूल्यांकन पर आधारित है। यह एक प्रारम्भिक रिपोर्ट है और इस विषय पर अधिक व्यापक और गहन अध्ययन की आवश्यकता है।
बाल अधिकार सम्मेलन: नया साल हमारा सवाल
[English] बाल अधिकारों की वर्तमान दशा के बारे में बच्चों के विचारों को जानने हेतु लखनऊ में प्लान इंडिया और सवांद सामाजिक संस्थान की ओर से 'बाल सम्मेलन' आयोजित किया गया। इस बाल सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न शहरों और गांवो से लगभग 200 लड़के-लड़कियों ने भाग लिया एवं विभिन्न प्रतियोगिता में भागीदारी की। इन प्रतियोगिताओं की मुख्य थीम थी: "नया साल हमारा सवाल"।
सोशलिस्ट पार्टी ने उठाई 50% महिला आरक्षण की मांग
यौनिक हिंसा के मामले में विधि-बदलाव के लिए सुझाव देने हेतु, भारत सरकार द्वारा नियुक्त जस्टिस वर्मा कमेटी के लिए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने लखनऊ में खुली परिचर्चा का आयोजन किया जिसमें अनेक नागरिकों ने भाग लिया। सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ संदीप पाण्डेय, उत्तर प्रदेश राज्य अध्यक्ष गिरीश कुमार पाण्डेय और ओंकार सिंह भी इस परिचर्चा में शामिल रहे। सोशलिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में आए सुझाव निम्नलिखित हैं:
लिंग-जनित हिंसा पर चुप्पी तोड़ें
[English] लखनऊ विधान सभा के सामने अंबेडकर महासभा में आज लिंग-जनित भेदभाव और हिंसा के मुद्दे पर खुला संवाद और उसके पश्चात मोमबत्ती प्रदर्शन का आयोजन हुआ। संवाद में दिल्ली में हुए सामूहिक यौन हिंसा पर बिना विलंब कारवाई की मांग हुई और यह बात भी स्पष्ट रूप से जाहिर हुई कि ऐसी महिलाओं की संख्या अत्याधिक है जिनको लिंग-जनित हिंसा के बाद न्याय नहीं मिला है और वें भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही हैं।
मजदूरों-किसानों की मांगों को लेकर अनशन का चौथा दिन
[English] सोशलिस्ट पार्टी के तत्वावधान में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय, लोक
राजनीति मंच, हिन्द मजदूर सभा, रिहाई मंच व विशेष शिक्षक एवं अभिभावक
एसोशिएसन के संयुक्त धरने-अनशन के कार्यक्रम ने आज चौथे दिन में प्रवेश
किया। अनशन पर संदीप पाण्डेय व अनिल मिश्र बैठे हुए हैं।मजदूर और किसान आयोग का अविलंब गठन किया हो: डॉ संदीप पाण्डेय
| फोटो साभार: राजीव यादव |
असंगठित क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी रुपए 440 प्रतिदिन की मांग को लेकर आज 25 दिसम्बर 2012 को तीसरे दिन भी विधान सभा के सामने अनशन जारी रहा। अनशन पर मग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पाण्डेय, श्री अनिल मिश्रा व श्री मुन्नालाल शुक्ला बैठे हैं।
मजदूरों, किसानों समेत पूरे वंचित वर्ग की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन
| फोटो साभार: राजीव यादव |
टीबी-एचआईवी का बढ़ता जाल
एचआईवी से पीड़ित लोगों में मौत का एक प्रमुख कारण टीबी है, अतः एचआईवी के साथ जीवनयापन करने वालों को बचाने के लिए टीबी-एचआईवी के सह-संक्रमण से निपटना आवश्यक है। पूरे विश्व में 10 लाख से अधिक लोगों को टीबी एवं एचआईवी के उपचार की एक साथ ज़रूरत पड़ती है। वर्ष 2011 में, 340 लाख से अधिक लोग एचआईवी वाइरस से संक्रमित थे और पिछले 30 सालों में (जब से इस महामारी की शुरुआत हुई) अब तक लगभग 250 लाख से अधिक लोग इस बीमारी के कारण मृत्यु का शिकार हो चुके हैं।
प्रोफेसर राजेन्द्र प्रसाद, दिल्ली के पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट के निदेशक नियुक्त
[English] प्रोफेसर राजेन्द्र प्रसाद वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इन्स्टीट्यूट, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के निदेशक के पद पर नियुक्त किये गये हैं और उन्होने संस्थान के निदेशक पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। इससे पूर्व वह उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, सैफई के निदेशक के पद पर तथा के॰ जी॰ चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ के पल्मोनरी मेडीसिन विभाग के विभागाध्यक्ष पद पर भी कार्यरत रहें हैं। प्रोफेसर प्रसाद ने 1974 में एम. बी. बी. एस. और 1979 में एम. डी. की उपाधि केव्म् जीव्म् मेडीकल कॉलेज, लखनऊ से ग्रहण की। इसके अतिरिक्त इन्होंने जापान से पल्मोनरी मेडिसिन, फाइबर-ऑप्टिक ब्रोन्कोस्कोपी और फेफड़ें के कैंसर में उच्च प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
क्या आपके फेफड़े संक्रमण से सुरक्षित हैं ?
जीवित रहने के लिए सांस लेना अहम है और सांस लेने के लिए स्वस्थ फेफड़े का होना बहुत आवश्यक है। परन्तु विश्व भर में सैकड़ों लाखों लोग प्रतिवर्ष फेफड़े संबंधी रोग जैसे टीबी, अस्थमा, निमोनिया, इन्फ़्लुएन्ज़ा, फेफड़े का कैंसर और फेफड़े सम्बन्धी अन्य दीर्घ प्रतिरोधी विकारों से पीड़ित होते हैं और लगभग 1 करोड़ व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त होते हैं। फेफड़ों के रोग हर देश व सामाजिक समूह के लोगों को प्रभावित करते हैं, लेकिन गरीब, बूढ़े, युवा और कमजोर व्यक्ति पर जल्दी असर डालते हैं. फेफड़ों में फैलने वाले इन संक्रमणों के बारे में लोगों के बीच जानकारी का अभाव है। प्रदूषित वातावरण, घर के भीतर का प्रदूषण (जैसे: लकड़ी, कंडे या कोयले को जला कर खाना पकाना), धूम्रपान, तम्बाकू आदि कई कारणों से फेफड़े संबंधी रोगियों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है। परन्तु यदि उचित जीवन शैली और धूम्रपान मुक्त वातावरण बनाया जाये तो फेफड़े सम्बन्धी संक्रमणों को कम किया जा सकता है।
तंबाकू नियंत्रण संधि परक्रामण को तंबाकू उद्योग से सबसे बड़ा खतरा
[English] सियोल, दक्षिण कोरिया: आज विश्व तंबाकू नियंत्रण संधि को अधिक मजबूत करने के लिए एक सप्ताह की अवधि का परक्रामण आरंभ हुआ। विश्व तंबाकू नियंत्रण संधि, जो विश्व की पहली जन स्वास्थ्य और उद्योग की जवाबदेह ठहरने के लिए बनी संधि है उसको तंबाकू उद्योग से निरंतर चुनौती मिलती रही है।
निमोनिया पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में मौत का प्रमुख कारण
निमोनिया वायरस, बैक्टिरिया, फॅंगस और पैरासाइट से फेफड़ों में होने वाला एक संक्रामक रोग है। लेकिन इसका उपचार समय रहते एंटीबायोटिक के उपयोग के साथ आसानी से किया जा सकता है और जिसमें खर्च 55 रुपये अथवा $1 से भी कम होता है, फिर भी पूरे विश्व में प्रतिवर्ष पाँच साल से कम उम्र के 14 लाख बच्चे निमोनिया के कारण मृत होते हैं जो कि एड्स, मलेरिया और टीबी से होने वाले कुल मौतों से भी अधिक है। परंतु यदि सही विधि से नवजात शिशुओं को जन्म के पहले छः माह तक सिर्फ स्तनपान और उसके बाद उचित पोषण दें तो निमोनिया से होने वाले इन मौतों को कम किया जा सकता है।
सुनियोजित एवं समन्वयित मलेरिया कार्यक्रम आवश्यक
[English] विश्व स्वास्थ्य संगठन की नयी 2012 मलेरिया रिपोर्ट जारी करते हुए रोल बैक मलेरिया संगठन ने मलेरिया का विकास और स्वास्थ्य प्रणाली से संबंध पर प्रकाश डाला। मलेरिया से मृत्यु तक हो सकती है यदि समोचित इलाज न मिले। हर साल सिर्फ भारत समेत एशिया में 2 अरब लोग मलेरिया इस प्रभावित होते हैं। इस 2012 मलेरिया रिपोर्ट पर मीडिया संवाद में चर्चा आयोजित हुई थी। इस मीडिया संवाद को स्वास्थ्य को वोट अभियान, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सीएनएस), हेल्थ राइटर्स, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। आरबीएम की फिल्म का भी चित्रण किया गया।
हमारे परिप्रेक्ष्य में विश्व टीबी रिपोर्ट के क्या मायने हैं? रिपोर्ट विमोचित
“हमारे परिप्रेक्ष्य में विश्व टीबी रिपोर्ट 2012 के क्या मायने हैं?” नामक रिपोर्ट हिन्दी एवं अँग्रेजी भाषाओं में प्रख्यात सर्जन एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार से सम्मानित प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त द्वारा विमोचित हुई। यह रिपोर्ट, “सीएनएस दृष्टिकोण” शृंखला के अंतर्गत जारी की गयी है जो स्वास्थ्य से जुड़े सामयिक प्रकाशनों का हमारे परिप्रेक्ष्य में विश्लेषण प्रस्तुत करती है। इस रिपोर्ट में, विश्व टीबी रिपोर्ट 2012 को पढ़ कर भारत के पुनरीक्षित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, पूर्व वर्षों में जारी हुई टीबी रिपोर्टों और स्टॉप-टीबी ग्लोबल प्लान 2011-2015 के परिप्रेक्ष्य में सीएनएस द्वारा विश्लेषण किया गया है। इसको सीएनएस संपादिका शोभा शुक्ला ने बंगलुरु की भारती घनश्याम, बाबी रमाकांत, राहुल द्विवेदी और रितेश आर्या के साथ लिखा है और स्वास्थ्य को वोट अभियान, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस (सीएनएस), जर्नलिस्ट्स अगेन्स्ट टीबी, हेल्थ राइटर्स, आशा परिवार, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, और ग्लोबल स्टॉप-टीबी ई-फोरम ने संयुक्त रूप से प्रकाशित किया है।
पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट निर्णय की समालोचना की
[English] हाल ही में सेवा-निवृत्त हुए केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी लखनऊ में सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की समालोचना की जिसमें कि सूचना आयुक्त का न्यायिक पृष्ठभूमि से होना अनिवार्य किया गया है और सब सुनवाई 2 सूचना आयुक्त की बेंच द्वारा होना (2 में से 1 सूचना आयुक्त कम-से-कम न्यायिक पृष्ठभूमि का हो) भी अनिवार्य किया गया है। उन्होने वाजिब तर्क दिये कि सूचना आयोग में क्यों न्यायिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति का होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उनका तर्क था कि सूचना आयोग को सिर्फ यह निर्णय लेना होता है कि सूचना देनी है या नहीं।
टीबी-डायबिटीज का बढ़ता प्रकोप
शोध से यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि डायबिटीज का सम्बंध टीबी रोग से है। शोध के अनुसार डायबिटीज होने पर टीबी रोग के होने का खतरा 3 गुना बढ़ जाता है, और यदि व्यक्ति तंबाकू सेवन या धूम्रपान करता हो, तो टीबी रोग होने का खतरा 5 गुना तक बढ़ जाता है। डायबिटीज एक ऐसी भयंकर रोग है जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बहुत बढ़ जाती है, क्योंकि या तो शरीर में रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने वाले इंसुलिन नामक हार्मोन का निर्माण बंद हो जाता है या इंसुलिन हार्मोन अपने कार्य को ठीक से नहीं कर पाता है। सम्पूर्ण विश्व में लगभग 3660 लाख लोग डायबिटीज के साथ जीवन यापन कर रहे हैं, जिसमें से 90% वयस्क द्वितीय प्रकार की डायबिटीज से ग्रस्त है। वर्ष 2011 में पूरे विश्व में लगभग 46 लाख लोग डाइबेटीज़ जनित रोगों के कारण मृत्यु का शिकार हुए, जिनमे से 80% लोग निम्न व मध्यम आय वाले देशों से थे, और 2030 तक यह संख्या दुगुनी हो सकती है।
मधुमेह और तपेदिक (टीबी) स्वास्थ्य कार्यक्रमों में समन्वयन जरूरी
अनेक मजबूत शोध और आंकड़े यह प्रमाणित करते हैं कि मधुमेह (डाइबिटीस) और तपेदिक (टीबी) सह-रोगों में सीधा संबंध है। मधुमेह और टीबी सह-रोगों से जूझ रहे लोगों की संख्या इतनी है कि यह जरूरी हो गया है कि मधुमेह और टीबी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में भी आवश्यक समन्वयन हो। इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टीबी अँड लंग डीसीज (द यूनियन) के वरिष्ठ सलाहकार प्रोफेसर (डॉ) एंथनी हैरिस ने कहा कि जैसे एच0आई0वी0 और टीबी सह-संक्रमण एक चुनौती है उसी तरह से यदि पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो मधुमेह से भी टीबी महामारी में बढ़ोतरी हो सकती है। डॉ हैरिस, सी-ब्लॉक चौराहा, इन्दिरा नगर स्थित प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त केंद्र पर वेबिनार द्वारा मीडिया संवाद को संबोधित कर रहे थे। इस मीडिया संवाद को स्वास्थ्य को वोट अभियान, आशा परिवार, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय ने आयोजित किया था।
संक्रमण को बढ़ाता है घर के भीतर का वायु प्रदूषण
सम्पूर्ण विश्व में लगभग 3 अरब लोग, (जो अधिकांशत: कम आय वाले देशों में रहते हैं) खाना पकाने, रोशनी और तापने के लिए ठोस ईंधन पर निर्भर हैं। लकड़ी/कंडे/कोयला आदि जलाकर खाना पकाने वाले चूल्हे/अँगीठी के धुएँ में कार्बन मोनोऑक्साइड, और अन्य ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं जो घर के अंदर की हवा के प्रदूषण स्तर को कई गुना अधिक बढ़ा देते है, जो विशेषकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है. अध्ययनों से पता चलता है कि घर के भीतर का वायु प्रदूषण सम्पूर्ण विश्व में कुल रोग के 2.7% भाग के लिए जिम्मेदार है तथा तीन तरह के फेफड़े संबंधी रोग के खतरों को बढ़ाता है (1) बच्चों में फेफड़े संबंधी श्वसन संक्रमण (2) महिलाओं में दीर्घ प्रतिरोधी फेफड़े का विकार (सी.ओ.पी.डी) तथा (3) कोयले के धुएं के संपर्क में आने से महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर।
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