अक्स.डी.र. टीबी या तपेदिक [XDR-TB] के रोगियों को उम्र भर के लिए अलग रखा जाएगा
एक्स्तेंसिवेली ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक के रोगियों में से आधों की मृत्यु शीघ्र ही हो जाती है। विज्ञान के पासअभी फिलहाल ऐसा कोई प्रावधान नही है कि मरीज को ठीक करना तो दूर उसका संक्रमण न फैले ऐसी दवाएं भीउपलब्ध नही हैं।
अमरीका के एक टीबी या तपेदिक विशेषज्ञ का कहना है कि पहले जैसे कि प्लेग, लेप्रसी या कुष्ठ रोग, और येलोफीवर में होता था कि मरीज को उम्र भर के लिए समाज से अलग रखा जाता था क्योकि कोई इलाज नही था औरकोई ऐसा प्रावधान नही था कि मरीज का संक्रमण और लोगों में न फैले। यही अब एक्स्तेंसिवेली ड्रग रेसिस्तंतटीबी या तपेदिक के रोगियों के साथ किया जाएगा और उनको उम्र भर के लिया सबसे अलग रखना ही पड़ेगा ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रपट के अनुसार हर साल ४०,००० से अधिक एक्स्तेंसिवेली ड्रग रेसिस्तंत टीबी के रोगीदुनिया में बढ़ जाते हैं। ये एच.आई.वी से भी अधिक खतरनाक है क्योकि ये जानलेवा है और आधे से अधिक रोगीमृत्यु को प्राप्त होते हैं।
अब जन स्वास्थ्य नीतियाँ और अन्य जन-कल्याण नीतियाँ भी परिवर्तित की जा रही हैं जिससे एक्स्तेंसिवेली ड्रगरेसिस्तंत टीबी या तपेदिक के रोगी को समाज के कल्याण में कानूनी रूप से उम्र भर के लिए सबसे अलग रखा जासके। ऐसा करना सदियों पीछे जाने जैसा होगा क्योकि पहले जब एंटी-बिओटिक दवा नही इजात हुई थी, तबप्लेग, लेप्रसी, और येलो फीवर को नियंत्रित करने के लिए ऐसा करना पड़ा था। आज जब इतनी तमाम एंटी-बियोटिक दवा हैं उसके बावजूद हमें सदियों पहले वाले जन स्वास्थ्य के तरीकों को अपनाना पड़ रहा है.
नंदीग्राम: CPI (ऍम) के गुंडों ने राधारानी का दुबारा बलात्कार किया
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नंदीग्राम में गोकुल्नगर छेत्र के एक गावं में छपी (ऍम) के गुंडों ने राधारानी आरी का दुबारा से बलात्कार किया और अन्य महिलाओं और पुरुषों पर आक्रमण किया. जो लोग घायल हुए हैं, वो नंदीग्राम सरकारी अस्पताल में भरती हैं.
नंदीग्राम में निरंतर होती हिंसा का भीषण खंडन करते हुए हमारी मांग है कि:
नेशनल
जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय
पश्चिम बंगाल, भारत
(बी.उ.पर.क. नंदीग्राम)
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तपेदिक या टीबी समाचार
२१ अप्रैल २००८
अमरीका के स्टर्लिंग में जेल के एक कैदी को लैतैंट टीबी या तपेदिक हो गई और वहाँ की मीडिया में सनसनी फैली. लैतैंट टीबी या लैतैंट तपेदिक तब कहते हैं जब संक्रमण सक्रिय नही हुआ हो और उस व्यक्ति से किसी और को भी टीबी नही फ़ैल सकती जब तक उसकी टीबी सक्रिय संक्रमण का रूप न धारण कर ले।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने भरसक प्रयास किया कि न तो जेल के अन्य कैदियों को परेशां होने की आवश्यकता हैऔर न ही स्टर्लिंग छेतरे के अन्य निवासियों को।
अमरीका में एक लैतैंट टीबी या तपेदिक से इतनी सनसनी मच सकती है, और भारत में जहाँ १/३ जनता को लैतैंट टीबी या तपेदिक है, और कोई खलबली नही?
वही अमरीका में नॉर्थ लिंकांशिर में एक हाई स्कूल के छात्र को टीबी निकल आई थी (फरवरी २००८)। अन्य छात्रोंका शिक्षकों का और अभिभावकों का टीबी टेस्ट करने पर १४ अन्य लोगों को लैतैंट टीबी या तपेदिक या फिरएक्टिव या सक्रिय टीबी या तपेदिक निकल के आई है। सबका उपयुक्त इलाज हो रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने ये नही स्पष्ट किया कि कितने लोगों को लैतैंट टीबी या तपेदिक है और कितनों को एक्टिव या सक्रिय टीबी रोग।
ये भी गौर करने की बात है कि अमरीका में कैसे एक छात्र को टीबी हो जाने से सब स्कूली छात्र, शिक्षक और अभिभावक जो उन छात्रों के सम्पर्क में रहे हों, सबकी जांच होती है और समय रहते उपयुक्त इलाज होता है। ऐसा करना भारत में मुमकिन ही नही क्योकि १/३ जनता को तो लैतैंट टीबी है और स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही जरुरत और छमता से कही अधिक लदी हुई है।
बजट घटने से घुटनों पर पैंट गिरा कर कोई टीबी नियंत्रण के लिए कैसे दौड़ सकता है?
अमरीका के कैलिफोर्निया प्रदेश के गवर्नर अर्नोल्ड स्च्वाज़नेगेर ने बजट में कटौती कर दी है, जिसका प्रभाव टीबी नियंत्रण कार्यक्रम पर भी पड़ रहा है।
टीबी नियंत्रण अधिकारी डॉ रॉबर्ट बेंजामिन का कहना है कि घुटनों पर पैंट गिरा कर कोई टीबी नियंत्रण के लिए कैसे दौड़ सकता है?
कैलिफोर्निया में जब कंप्यूटर के छेत्र में बूम आया था तो कई देशों से लोगों का आवागमन बढ़ता चला गया था और हालांकि टीबी विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश टीबी उन्ही लोगों में पायी जाती है जो कम से कम ५ साल से अमरीका में ही निवास कर रहे हों, फिर भी अन्य देशों से आए लोगों में टीबी का अनुपात अधिक है।
इस लेख में कई दिल को हिला देने वाले विवरण हैं जैसे कि एक वरिष्ठ कंपनी के अधिकारी को जबरन अपने ग्राहकों को फ़ोन कर के ये सचेत करना पड़ा कि उनको भी टीबी होने का खतरा है क्योकि उसको टीबी निकल आई है।
उसी तरह एक महिला, जो पहली बार माँ बनने को है और उसको ड्रग रेसिस्तंत वाली टीबी या तपेदिक निकल आई है और उपयुक्त इलाज हो रहा है मगर इन दवाओं का प्रभाव टीबी के कीटाणु पर तो पड़ता ही है, बल्कि अन्य प्रभाव भी पड़ते हैं क्योकि ये दवाएं काफी तेज़ होती हैं। इस महिला को सुनने में कठिनाई होने लगी है, इसके पैरों की अंगुलियाँ सुन्न पड़ गई हैं, चेहरे पर रैय्श पड़ गए हैं और इसका वजन गिरता चला जा रहा है।
एक विशेषज्ञ का कहना है कि मालती ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का अनुपात बढ़ता ही जाएगा क्योकि मात्र अमरीका में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम चलने से टीबी नियंत्रित नही होगी और अमरीका का नियंत्रण दुनिया भर के टीबी नियंत्रण कार्यक्रम पर नही है। जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में, गरीबी और कठिन हालातों के रहते हुए, विकासशील देशों में टीबी या तपेदिक का अनुपात बढ़ता ही जाएगा, विशेषकर कि ड्रग रेसिस्तंत टीबी या तपेदिक का।
पोस्को दरियादिली से नही, धूर्त योजना-तहत विस्थापित लोगों को मुआवजा दे रहा है
- एक और पनपता हुआ आर्थिक घोटाला -
संदीप दासवर्मा और सनत मोहंती ने इसके पहले भी तीन गहन अध्यन के बाद उड़ीसा में पोस्को के स्टील से संबंधित लेख लिखे हैं। उनके पढने के लिए यहाँ क्लिक्क करें:
Orissa: An Economic Scam Coming?
POSCO Project is not an unquestionable boon for Orissa
Who will gain from the POSCO Project in Orissa?
संदीप दासवर्मा और सनत मोहंती ने इसके पहले भी तीन गहन अध्यन के बाद उड़ीसा में पोस्को के स्टील से संबंधित लेख लिखे हैं। उनके पढने के लिए यहाँ क्लिक्क करें:
Orissa: An Economic Scam Coming?
क्या उड़ीसा में आर्थिक घोटाला पनप रहा है?
तपेदिक या टीबी समाचार, १९ अप्रैल 2008
19 अप्रैल २००८
नई दिल्ली से अमरीका तक की यात्रा में हवाई-जहाज में सवार एक महिला जो अमरीकी है और जिसकोमुल्टी-ड्रग रेसिस्तंत टीबी या ऍम.डी.आर. टीबी थी, ने खलबली मचा दी थी। जब ये ज्ञात हुआ कि ऍम.डी.आर. टीबी से ग्रसित ये महिला हवाई यात्रा कर के आई है, तो अमरीका में अन्य हवाई-जहाज के यात्रियों को सम्पर्क किया गया और स्वास्थ्य विभाग और कोर्ट के आदेश से जबरन टीबी की आंच की गई। इनमे से एक को टीबी निकल आई है।
जरा सोचें कि अमरीका टीबी नियंत्रण के लिए जो करता है और बाकि विकसित देश भी जिस तरह से गंभीरता से रोक्द्हम का प्रयास कर रहे हैं, वो विकासशील देशों में मुमकिन है ही नही। विकासशील देशों में भीड़-भाड़ से बचना मुमकिन है ही नही और इस तरह सब यात्रियों को खोज खोज के जांच करना आदि भी मुमकिन नही। नि:संदेह ये समाधान नही है टी.बी नियंत्रण का।
अमरीका के न्यू मेक्सिको में एक स्वास्थ्य कर्मचारी को टीबी निकल आई। अब २५० से अधिक मरीज और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी जो इस टीबी संक्रमित कर्मचारी के सम्पर्क में थे, उन सब की जांच हो रही है।
कुवैत ने ग्लोबल फंड टू फाइट एड्स, टीबी और मलेरिया को ५००,००० अमरीकी डालर अनुदान दे के एक मिसाल कायम की है। अन्य विक्सित और विकासशील देशों को अपने बजट से मुनासिब धनराशी एड्स, टीबी और मलेरिया की रोक्धाम के लिए समर्पित करनी चाहिए तभी ये कार्यक्रम स्थायी होंगे और कुछ नतीजे निकल के आयेंगे।
तपेदिक या टी.बी समाचार, १९ अप्रैल २००८
अमरीका में गाय-भैसों में तपेदिक या टीबी नियंतरण के लिए हाल ही में १६ मिलियुन अमरीकी डालर तीन प्रदेशों को दिए गए थे (मिन्नेसोता, कैलिफोर्निया और मिचिगन)।
मिन्नेसोता प्रदेश में गाय या भैसों में टीबी या तपेदिक की रोकधाम के लिए प्रदेश संसद ने ये फ़ैसला लिया है कि टीबी से ग्रसित गाय-भैसों को मार दिया जाएगा, गाय-भैसों को बंद जगह में रखा जाएगा और जिन किसानों या लोगों के पशुओं को मारा जाएगा उनको ५०० अमरीकी डालर हर्जाना दिया जाएगा। ऐसा तब तक चलेगा जब तक मिन्नेसोता में गाय-भैसों में टीबी खत्म नही हो जाती।
गाय-भैसों में टीबी को बोवीन टी.बी कहते हैं। बोवीन टीबी पशुओं से मनुष्य को संक्रमित पशु से सम्पर्क से और कच्चा दूध पीने से टीबी हो सकती है परन्तु पस्तुएरिज़ेद् दूध पीने से कोई खतरा नही है।
अंग्रेज़ी के कवि और डॉक्टर जॉन कीट्स २५ साल की उम्र में तपेदिक या टीबी से मरे थे। हालांकि विश्व में टीबी या तपेदिक के नए संक्रमण का दर कम हो रहा है परन्तु ड्रुग रेसिस्तंत टीबी का दर बढ़ रहा है।
अज़रबैजान नामक राष्ट्र में जो पहले रूस का भाग था, वहाँ टीबी का दर भायावाही स्थिति पैदा कर रहा है। कुछ जगह तो ५६ प्रतिशत टीबी के केस ड्रुग रेसिस्तंत हैं। वहाँ ९०० जेल के कैदियों में से लग्भाघ १५०-२०० को टीबी होती थी। इस साल ये दर नीचे आ रहा है और इस वर्ष सिर्फ़ ६० लोगों को ही टीबी है। परन्तु इन ६० में से २ लोग एच.आई.वी के साथ भी संक्रमित हैं।
क्या कोका-कोला के बोतलबंद पानी में गरम हवा भरी है?
शेयरहोल्डर और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कोका कोला की ‘हरी’ छवि को चुनौती दी
इसे अंग्रेज़ी
१६ अप्रैल २००८ को कोका कोला की शेयरहोल्डर बैठक में जब कोका कोला ये प्रयास कर रहा था कि वो दुनिया की पानी की समस्या का समाधान कर रहा है और एक ‘जिम्मेदार’ उद्योग है, कई सामाजिक कार्यकर्ता औरशेयरहोल्डर ने ये सवाल खड़ा कर दिया कि: क्या कोका कोला के बोतलबंद पानी में सिर्फ गरम हवा भरी है?
पैटी लीन
काम्पैग्न निदेशक
कार्पोरेट अच्कोउन्ताबिलिटी इंटरनेशनल
(उद्योगों कि जवाबदेही बढ़ने के लिए समर्पित अंतर्राष्ट्रीय संगठन)
www.stopcorporateabuse.org
फ़ोन: ६१७-६९५-२५२५
फैक्स: ६१७-६९५-२६२६
ईमेल: plynn@stopcorporateabuse.ओआरजी
इसे अंग्रेज़ी
अमिताभ बच्चन के फिल्मों में तम्बाकू सेवन करने के विरोध में हाई-कोर्ट में केस
"हम लोग इन्साफ के लिए
"ये साफ दिखाई देता है कि श्री अमिताभ बच्चन, फैमिली फ़िल्म में सिगार पी रहे थे, जिसके पोस्टर हर जगह लगाये गए थे. ये न केवल गोया प्रदेश के अधिनियम का खुला उलंघन है बल्कि भारत के राष्ट्रीय सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम का भी खुला उलंघन है. Session कोर्ट ने पिछले महीने मार्च में अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ सारे चार्ज खारिज कर दिए थे" डॉ सालकर ने कहा.
मार्च २००८ में नॉर्थ गोया के जज यू.वी.बकरे ने अमिताभ बच्चन जो अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष हैं, उनके ख़िलाफ़ सारे दावे खारिज कर दिए थे.
सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पादन अधिनियम (२००३) के अनुसार फिल्मों में तम्बाकू सेवन को प्रदर्शित नही करना चाहिए क्योकि देश में और विदेशों में भी हुए शोध के अनुसार बच्चों और युवाओं में तम्बाकू सेवन आरंभ करने के लिए जिम्मेदार सबसे बड़ा कारण है फिल्मों में तम्बाकू सेवन को प्रदर्शित करना.
भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अंबुमणि रामादोस ने अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू नियांतरण कांफेरेंस २००६ में दुनिया का प्रतिष्ठित पुरुस्कार, लुथेर तेर्री पुरुस्कार लेते हुए कहा था कि:
"शोधों से ये स्थापित हो चुका है कि बच्चों और युवाओं के तम्बाकू सेवन
आरंभ करने के लिए सबसे बड़ा कारण है फिल्मों में तम्बाकू सेवन का प्रदर्शन. जब से सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पादनअधिनियम २००३ लागु हुआ है तबसे फिल्मों में तम्बाकू के ब्रांड भी दिखाए जाने लगे हैं"
जनवरी २००६ में जब अमिताभ बच्चन ने फैमिली फ़िल्म में सिगार पिया था तो इस फ़िल्म के पोस्टर जिनपर अमिताभ सिगार पी रहे थे, देश भर में लग गए थे. गोया में NOTE ने और लखनऊ में Indian Society Against Smoking (या भारतीय तम्बाकू विरोधी संगठन ISAS) ने अमिताभ को कानूनी नोटिस जारी किए थे. NOTE इस केस को आगे ले के गई और अमिताभ पर गोवा कोर्ट में केस कर दिया.
तपेदिक या टी.बी नियंतरण के लिए आया पैसा इस्तिमाल नही हुआ पश्चिम बंगाल में
तपेदिक या टी.बी नियंतरण के लिए आया पैसा इस्तिमाल नही हुआ पश्चिम
मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में ये स्पष्ट किया गया कि पश्चिम बंगाल में हर सम्भव प्रयास करना चाहिए कि जिन लोगों को टी.बी है खासकर कि दृग-रेसिस्तंत टी.बी या ऐसी टी.बी जिसपर अधिकांश दवा कारगर नही रहती, उनको चिन्हित करना जरुरी है, उनके लिए हर सम्भव इलाज उपलब्ध करना जरुरी है, और इसके लिए आई धनराशी को इस्तिमाल करना चाहिए।
कल अमरीका में ओमाहा में हाई स्कूल के छात्र को टी.बी हो जाने से खलबली मच गई। स्कूल के बाकि छात्रों के अभिभावकों को बुलाया गया और तपेदिक या टी.बी से संबंधित जानकारी दी गई। इस सत्र के पश्चात सभी अभिभावक संतुष्ट थे। ये एक अच्छा उदाहरण है क्योकि अमरीका में पहले कई स्थानों पर एक बच्चे को टी.बी हो जाने पर जिस तरह से हर बच्चे, हर शिक्षक, अभिभावक आदि को जबरन कोर्ट के आदेश पर टी.बी की जांच के लिए ले जाया गया और अधिकांश ऐसे हादसों में किसी को भी टी.बी या तपेदिक नही निकली थी। ये जरुरी है कि समाज में हड़कंप नही तपेदिक या टी.बी की रोक्धाम के लिए समझ पनपे!
वही अमरीका के कैलिफोर्निया में जहाँ तपेदिक या टी.बी का दर बढ़ रहा है, वह के गोवेर्नोर और फ़िल्म-अभिनेता अर्नोल्ड श्वाजंगर ने १०% बजट कम कर दिया है। इससे तपेदिक या टी.बी के कार्यक्रम के प्रभावित होने की सम्भावना है।
अमरीका और इंग्लैंड की गाय-भैसों में बढ़ती टी.बी. से प्रशासन हरकत में
अमरीका और इंग्लैंड की गाय-भैसों में बढ़ती टी.बी. से प्रशासन हरकत में
अमरीका में पहले ही कैलिफोर्निया प्रदेश में गाय-भैसों में बढ़ती टी.बी पर प्रदेश सरकार काफ़ी चिंतित थी, हाल ही में अन्य प्रदेश जैसे की मिन्नेसोता में भी गाय-भैसों में बढ़ती टी.बी या तपेदिक से मिन्नेसोता प्रदेश सरकार चौकन्ना हो उठी और संक्रमण की रोकधाम के लिए गाय-भैसों का मिन्नेसोता प्रदेश की सरहद लांघना तक मुश्किल हो गया है.
जेल में तम्बाकू नियंत्रण है एक गंभीर चुनौती: IG prisons
कर्नाटक के अद्दिशनल महा-निदेशक पुलिस और इंसपेक्टर-जनरल (कारागार) अस.टी.रमेश के अनुसार जेलपरिसर में तम्बाकू नियंत्रण या तम्बाकू नशा उन्मूलन एक गंभीर चुनौती है।
डेकन हेराल्ड में प्रकाशित उनके लेख जेल के इतिहास से संबंधित एक रोचक जानकारी प्रस्तुत करता है। २६ अप्रैल१९४८ में एक वरिष्ट अधिकारी जो जेल का दौरा कर रहे थे, उनके अनुसार कुछ कम्युनिस्ट कैदियों को उनकी मांगके अनुरूप बीडी मिलनी चाहिए। जेल परिसर में तम्बाकू सेवन कानूनन ग़लत नही है क्योकि तम्बाकू की बिक्रीजेल की कैंटीन में कानूनन रूप से होती है। जेल मानुअल के अनुसार जेल की कैंटीन में तम्बाकू उत्पादन का विक्रयहो सकता है।
हाल ही में नागपुर जेल में कुछ संवेदनशील अधिकारियों की वजह से जेल परिसर को तम्बाकू मुक्त जेल बनाने काप्रयास हो रहा है। हालांकि जेल मानुअल में ये लिखा हुआ है कि जेल की कैंटीन में तम्बाकू विक्रय हो सकता है, इसके बावजूद भी नागपुर जेल के संवेदनशील अधिकारियों ने जन-स्वास्थ्य और अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण केअनुकूल जेल को तम्बाकू मुक्त परिसर बनाने की ठान ली है। ये नि:संदेह प्रशंसनिये प्रयास है और अन्य जेलप्रसाशन को भी इस पर अमल करना चाहिए और जेल मानुअल को परिवर्तित करना चाहिए।
ये इसलिए भी जरुरी है क्योकि सिर्फ़ धूम्र्पानी के अधिकार की बात नही है, बल्कि जेल के अन्य कैदियों और कराम्चारियों आदि के स्वास्थ्य और अधिकारों की बात है। परोक्ष धूम्रपान से अनेकों लोग जो स्वयं धूम्रपान नही करते बल्कि बंद कमरे में या बंद परिसर में अन्य कोई धूम्रपान कर रहा हो तो जलती तम्बाकू से निकलते हुए धुए को सभी उपस्थित लोग उसको श्वास द्वारा अन्दर फेफडे में लेते हैं, और तम्बाकू जनित बीमारियों का खतरा सबके लिए बढ़ जाता है - जो लोग धूम्रपान कर रहे हों और जो लोग धूम्रपान न कर रहे हों परन्तु उस बंद परिसर में उपस्थित हों जहा धूम्रपान हो रहा हो।
तम्बाकू उत्पादनों पर निकोटीन और टार की मात्र कब देखने को मिलेगी डॉ रामादोस?
"अब बिना विलम्ब आकास्मक स्तर पर ६० करोड़ भारतीयों को, जिनकी उमर ३० साल से कम है, उनको तम्बाकू, शराब, और फास्ट-फ़ूड से बचाने की आवश्यकता है"
"शराब के मसले पर तवज्जो देने की जरुरत है: मात्र ४ प्रदेशों में शराब प्रतिबंधित है –
पोस्को (POSCO) स्टील प्रोजेक्ट से उड़ीसा में कौन लाभान्वित होगा?
डॉ सनत मोहंती और संदीप दास्वेर्मा
ये लेख सनत और संदीप द्वारा लिखा
जैसा कि पहले दो लेखों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आर्थिक मूल्यांकन से जाहिर है कि पोस्को प्रोजेक्ट लोगों के हित को ध्यान में रख कर तो नही रचा गया है, सवाल ये उठता है कि आख़िर इससे किसको लाभ होगा और उड़ीसा के लोग इससे किस तरह से प्रभावित होंगे.
बस एक उम्मीद ये है कि सतर्क जन-संगठन और लोकतांत्रिक व्यवस्था जिसमे लोग भी शामिल होते हैं, वो पारदर्शिता बढ़ा सकती है और सबको जवाबदेह भी ठहरा सकती है. उदाहरण के लिए इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था और जन-संगठनों के कारण उड़ीसा सरकार अन्य राज्यों के साथ एक संगठन के रूप में भारत सरकार से और पोस्को से बेहतर दाम के लिए मांग करने पर विवश हो गई थी. जो समझौता हुआ है (memorandum ofunderstanding ) उसमें उड़ीसा सरकार दावा करती है कि वो इस प्रोजेक्ट को रफ़्तार से आगे बढ़ाएगी परन्तु लोगों के जीवन पर इस प्रोजेक्ट का क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में कोई विचार नही रखती.
उड़ीसा प्रदेश सरकार को जवाबदेह ठहराना
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उड़ीसा के लोगों को उड़ीसा सरकार से अधिक पारदर्शी होने की मांग करनी चाहिए, और पोस्को प्रोजेक्ट की योजना की समस्त जानकारी लोगों को उपलब्ध होनी चाहिए. क्या इस योजना में ये विचार किया
* इस प्रोजेक्ट से कृषि में नुकसान का मूल्य सरकारी आक्डें क्या बताते हैं? (नि: संदेह उड़ीसा सरकार ने इसका मूल्यांकन किया होगा यदि वो बिल्कुल ही व्यर्थ नही है तो!)
* इस प्रोजेक्ट से भूजल दोहन की और प्लांट से निकलने वाले गंदे दूषित पानी का कैसे उपचार होना चाहिए, इसकी उड़ीसा सरकार ने क्या कीमत लगाई है?
* उड़ीसा सरकार इन सब चुनौतियों से निबटने के लिए क्या योजना बना रही है? इस प्रोजेक्ट से प्राप्त धनराशी से क्या वो कृषि से होने वाली हानि की भरपाई करेगी, और लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाएगी, शिक्षा के केन्द्र बनाएगी? या वो इस धन से लोगों के लिए लघु-उद्योग स्थापित करेगी? उड़ीसा सरकार के पास इस प्रकार की ठोस योजना होनी चाहिए और लोगों तक ये योजना पहुचनी भी चाहिए.
कुल मिलकर उड़ीसा के लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से इस प्रोजेक्ट से मिलने वाला लाभ रुपया १२० करोड़ का होगा जो वार्षिक वेतन के रूप में इस प्रोजेक्ट में रोज़गार प्राप्त लोगों को मिलेगा, इस पैसे से स्थानिये अर्थ-व्यवस्था मजबूत होगी. वही दूसरी ओर उड़ीसा के लोगों को रुपया १८० करोड़ का नुकसान हो रहा है इस प्रोजेक्ट को जमीन उपलब्ध करा के, रुपया ७५ करोड़ प्रति वर्ष की मूल्य का पानी जो इस प्रोजेक्ट में इस्तिमाल होगा, रुपया १०० करोड़ प्रति वर्ष का नुकसान कृषि को होगा, और रुपया २,४०० - ३,६०० करोड़ के मूल्य का कर का नुकसान इस प्रोजेक्ट की पूरी अवधि में उड़ीसा सरकार को होगा.
इसके अलावा उड़ीसा सरकार जो कोयला, १२ मेगा टन प्रति वर्ष की स्टील बनाने में लगेगा, उसकी कीमत पर और उससे संबंधित कर का नुकसान भी उठाएगी.
उड़ीसा सरकार और पोस्को के मध्य इस प्रोजेक्ट से लोगों को भारी नुकसान होगा, और इस प्रोजेक्ट से जो लाभ मिल रहा है वो नि:संदेह अत्यन्त कम है. क्या उड़ीसा सरकार ये बताएगी कि ये डील उड़ीसा प्रदेश के लिए और लोगों के लिए क्यो और कैसे लाभकारी है?
भारत में लोहे के ओर की खदानों में ओर की मात्रा लगभग १८ अरब टन है जिसमे से उड़ीसा प्रदेश में ४.५ अरब टन है. उड़ीसा सरकार पोस्को को १ अरब टन लोहे का ओर देने को तैयार है, जिसमे से ४०० मेगा टन कोरिया को निर्यात हो जाएगा.
उड़ीसा सरकार इस आर्थिक घोटाले की बात करने को राज़ी नही है और न ही इस प्रोजेक्ट की अप्रत्यक्ष कीमत से संबंधित चर्चा पर. जो भी ऐसे सवाल उठा रहे हैं उनको उड़ीसा-प्रदेश के ख़िलाफ़ समझा जा रहा है. प्रदेश के अफसर और राजनीतिज्ञ उन लोगों को डरा धमका रहे है जो इस प्रकार के सवाल उठाने का दम रखते हैं.
ये स्पष्ट है कि ये डील उड़ीसा प्रदेश के लिए - 'जीत-जीत-हार' वाली डील है. पोस्को 'जीत' रहा है, उड़ीसा प्रदेश सरकार के राजनीतिज्ञों और अफसरों के लिए ये 'जीत' है और उड़ीसा के लोगों के लिए ये एक 'हार' का सौदा है.
कोई भी तर्क या कारण समझ से परे है जो ये सफ़ाई दे सके कि इस प्रोजेक्ट से क्यो लोहे के ओर इतनी कम मूल्य पर और किन शर्तों पर बेचे जा रहे है! परन्तु ये डील अभी हुई नही है, और जागरूक सतर्क और सचेत उड़ीसा के लोग ही उड़ीसा सरकार को आर्थिक और विकास के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह ठहरा सकते हैं.
हमारा ये भी मानना है कि इस प्रोजेक्ट में विस्थापन और पुनर्स्थापन का मुद्दा भी लोगों का ध्यान बाटने का प्रयास है. इस डील से रुपया २५०,००० करोड़ जो पोस्को को सब्सिडी आदि के जरिये प्राप्त होगा, उसपर लोगों का ध्यान ही नही है.
ये एक कारण हो सकता है कि क्यो पोस्को के प्रतिद्वंदी कम्पनियाँ जैसे कि टाटा, मित्ताल्स एंड जिन्दल्स आदि खामोश है, क्योकि सम्भावता उनको भी कुछ इसी तरह से मगर छोटे स्तर पर उड़ीसा सरकार ने जायज़-नाजायज़ लाभ दिए होंगे.
पोस्को स्टील प्रोजेक्ट में आर्थिक मुद्दे को केंद्रीय मुद्दा मानना चाहिए, ऐसा हमारा मानना है, और सरकार को जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराना चाहिए.
उड़ीसा सरकार की भ्रष्टाचार की ओर झुकाव को देख कर ये लगता है कि इस प्रोजेक्ट के मूल्यांकन में और हर कदम पर लोगों की भागीदारी अति-आवश्यक है जिससे कि एक पारदर्शी प्रक्रिया कायम हो सके और लोगों को ये पता रहे कि जो पैसा इस प्रोजेक्ट से प्राप्त हो रहा है, वो कहाँ खर्च किया जा रहा है और उससे लोग सही मायने में कहा तक लाभान्वित हो रहे हैं? और ऐसी प्रक्रिया के लिए संघर्ष में मुख्य भूमिका उड़ीसा के ही लोगों को निभानी चाहिए.
डॉ सनत मोहंती और संदीप दासवर्मा
ये लेख सनत और संदीप द्वारा लिखा
