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सह-संक्रमण और रोग के खतरे पलट सकते हैं एड्स नियंत्रण अभियान की प्रगति
विश्व में 86% एचआईवी के साथ जीवित लोगों को अपने एचआईवी पॉजिटिव होने की जानकारी थी, उनमें से 89%लोग जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवाएं ले रहे थे और इनमें से 93% लोगों का वायरल लोड नगण्य था (यानी कि वह स्वस्थ थे और उनसे वायरस फैलने का खतरा भी शून्य था)। पर यदि हम एचआईवी से संबंधित संक्रमण और रोग (या अन्य रोग जो समाज में हैं) पर ध्यान नहीं देंगे तो एड्स नियंत्रण अभियान में प्रगति पलट सकती है, यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का, जो एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों के सबसे देश व्यापी संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई), के एमेरिटस अध्यक्ष हैं।
गुजरात में पहली बार हो रहा है एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों का राष्ट्रीय अधिवेशन ASICON 2025
ASICON 2025 का उद्घाटन गुजरात के मुख्य मंत्री ने किया

गुजरात के मुख्य मंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने आज, देश के एचआईवी चिकित्सकीय विशेषज्ञों के 16वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन (ASICON 2025) का उद्घाटन किया। ASICON 2025 अधिवेशन इस साल अहमदाबाद, गुजरात, में 21-23 फ़रवरी के दौरान आयोजित हो रहा है। यह पहली बार है कि यह प्रतिष्ठित अधिवेशन गुजरात में आयोजित हो रहा है। एचआईवी चिकित्सकीय और आयुर्विज्ञान से जुड़े भारतीय विशेषज्ञों का सबसे प्रमुख चिकित्सकीय संगठन, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई) इस अधिवेशन को आयोजित कर रहा है।
2030 तक एड्स उन्मूलन के लिए सभी लोगों तक एचआईवी सेवाओं का पहुंचना है ज़रूरी
[English] एचआईवी संक्रमण से बचाव के अनेक प्रमाणित साधन उपलब्ध हैं और एचआईवी पॉजिटिव लोगों के लिए जीवनरक्षक दवाएं सरकारी सेवाओं में उपलब्ध हैं। यदि सभी एचआईवी के साथ जीवित लोगों को यह दवाएं मिलें, और उनका वायरल लोड नगण्य रहे, तो न केवल वह पूर्णत: स्वस्थ रहेंगे बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एचआईवी संक्रमण फैलना का खतरा भी शून्य रहेगा ("जीरो रिस्क")। तो फिर क्यों विश्व में 2023 में 6.3 लाख नए लोग एचआईवी से संक्रमित पाये गए और 13 लाख लोग एड्स-संबंधित कारणों से मृत हुए?
कैंसर बढ़ाने वाले कारणों पर बिना विराम लगाये कैसे होगी कैंसर रोकधाम?
कोरोना वायरस रोग महामारी पर अंकुश के लिए क्यों है ज़रूरी तम्बाकू उन्मूलन?
[English] भारत समेत जो देश इस समय कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) महामारी से जूझ रहे हैं, उनके वैज्ञानिक शोध आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि जो लोग अधिक आयु के हैं और जिन्हें गैर-संक्रामक रोग हैं, उन्हें कोविड-19 के गंभीर लक्षण हो सकते हैं और मृत्यु होने की सम्भावना भी अधिक है. विश्व में गैर-संक्रामक रोग के कारण 70% मृत्यु होती है. हृदय रोग, पक्षाघात, कैंसर, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि प्रमुख गैर-संक्रामक रोग हैं. इन सभी गैर-संक्रामक रोगों का खतरा अत्याधिक बढ़ाता है - तम्बाकू सेवन. किसी भी प्रकार के तम्बाकू सेवन करने से, जानलेवा गैर संक्रामक रोग का खतरा मंडराने लगता है और कोविड-19 होने पर भी परिणाम घातक हो सकते हैं.
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर एकजुट हुए अनेक चिकित्सक-विशेषज्ञ और महिला अधिकार-समानता कार्यकर्ता
[English] 100 साल से भी अधिक समय बीत गया है जब अमरीका में सोशलिस्ट पार्टी ने पहला अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया था जिसकी मुख्य मांग थीं: महिला समानता और चुनाव में वोट डालने का अधिकार. इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का केंद्रीय विचार है #BalanceForBetter, क्योंकि सरकारों द्वारा 2030 तक सतत विकास लक्ष्य का सपना और सबके लिए एक बेहतर दुनिया का सपना तभी मुमकिन है जब हर किस्म की लिंग-जनित असमानता समाप्त हो और हर इंसान बराबरी से सम्मानजनक ढंग से जीवन यापन कर सके.
जब एक-तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है तो यह जन-स्वास्थ्य प्राथमिकता क्यों नहीं?
[English] [वेबिनार रिकॉर्डिंग] [पॉडकास्ट] भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का लक्ष्य है कि गैर-संक्रामक रोग जैसे कि कैंसर का दर और असामयिक मृत्यु दर में 2025 तक 25% गिरावट आये. पर अनेक कैंसर दर और मृत्यु दर बढ़ोतरी पर है! "यदि सरकार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य पूरे करने हैं तो यह सुनिश्चित करना होगा कि कैंसर दरों में बढ़ोतरी न हो बल्कि तेज़ी से गिरावट आये. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार एक तिहाई कैंसर से बचाव मुमकिन है. तम्बाकू और शराब सेवन में तेज़ी से गिरावट, शारीरिक व्यायाम और गतिविधियों में वृद्धि होना, पौष्टिक आहार, आदि से न सिर्फ कैंसर नियंत्रण बल्कि जन स्वास्थ्य पर भी व्यापक रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा" शोभा शुक्ला ने वर्ल्ड कैंसर डे वेबिनार को संचालित करते हुए कहा. शोभा शुक्ला, लोरेटो कान्वेंट कॉलेज से सेवानिवृत्त वरिष्ठ शिक्षिका हैं जो आशा परिवार और सीएनएस से जुड़ीं हैं.तम्बाकू एक ज़हर
डा0 सूर्य कान्त, सीएनएस स्तंभकार
तम्बाकू आज के समय में फैल रही अधिकांश बीमारियों के पीछे एक बड़ा कारण है। इस की लत का प्रसार एक दुर्दम महामारी का रूप ले चुका है। ऐसे हालात में तम्बाकू से निर्मित उत्पादों के सेवन से न केवल व्यक्तिगत, शारीरिक, एवं बौद्धिक ह्रास हो रहा है, अपितु समाज पर भी इसके दूरगामी, व्यक्तिगत, सामाजिक, एवं आर्थिक दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे है। 16 वीं शताब्दी में अकबर के शासन मे पुर्तगाली पहली बार तम्बाकू ले कर भारत आये थे। जहाँगीर के शासनकाल मे इसके उपभोग को नियंत्रित करने के लिए इस पर भारी मात्रा पर कर लगाये गये। परंतु सदियां बीत गयी तम्बाकू व्यापार और उपभोग पर लेश मात्र भी अंकुश न लगा।
तम्बाकू आज के समय में फैल रही अधिकांश बीमारियों के पीछे एक बड़ा कारण है। इस की लत का प्रसार एक दुर्दम महामारी का रूप ले चुका है। ऐसे हालात में तम्बाकू से निर्मित उत्पादों के सेवन से न केवल व्यक्तिगत, शारीरिक, एवं बौद्धिक ह्रास हो रहा है, अपितु समाज पर भी इसके दूरगामी, व्यक्तिगत, सामाजिक, एवं आर्थिक दुष्प्रभाव दिखाई देने लगे है। 16 वीं शताब्दी में अकबर के शासन मे पुर्तगाली पहली बार तम्बाकू ले कर भारत आये थे। जहाँगीर के शासनकाल मे इसके उपभोग को नियंत्रित करने के लिए इस पर भारी मात्रा पर कर लगाये गये। परंतु सदियां बीत गयी तम्बाकू व्यापार और उपभोग पर लेश मात्र भी अंकुश न लगा।
बिना स्वस्थ पर्यावरण के स्वस्थ इंसान कहाँ?
स्वास्थ्य से जुड़े लोग अक्सर पर्यावरण को महत्व नहीं देते और पर्यावरण से जुड़े लोग स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर कम बात करते हैं। ज़मीनी हक़ीक़त तो यह है कि बिना स्वस्थ पर्यावरण के, इंसान समेत जीवन के सभी रूप, स्वस्थ रह ही नहीं सकते। जीवन से जीवन पोषित होता है. सरकारों ने सतत विकास लक्ष्यों का वादा तो किया है जिनमें स्वास्थ्य, पर्यावरण, लिंग जनित समानता, शहरी ग्रामीण सतत विकास, आदि सभी मुद्दों को एक दूजे पर अंतरंग रूप से निर्भर माना गया है पर सही मायनों में जिस विकास मॉडल के पीछे हम भाग रहे हैं वो हमारे पर्यावरण का विध्वंस कर रहा है और जीवन को अस्वस्थ। कैंसर मृत्यु दर में तेज़ी से गिरावट के बगैर 2030 के वायदे पूरे करना संभव नहीं
(वेबिनार रिकॉर्डिंग, पॉडकास्ट) विश्व कैंसर दिवस 2017 पर सरकार को यह मूल्यांकन करना जरुरी है कि विभिन्न प्रकार के कैंसर की दर कितनी तेज़ी से कम हो रही है ताकि भारत सरकार अपने वायदे अनुसार, 2030 तक कैंसर मृत्यु दर में एक-तिहाई गिरावट ला सके (सतत विकास लक्ष्य या एस.डी.जी.).
स्वास्थ्य व्यवस्था पर तम्बाकू जनित जानलेवा बीमारियों के भार से बच सकता है भारत
| प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त |
भारत में कैंसर दर (और मृत्युदर) १०% बढ़ा (२०११-२०१४): तंबाकू नियंत्रण एक बड़ी प्राथमिकता
[English] [Webinar recording] भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर के रोगियों की संख्या में और मृत्यु दर में लगभग १०% की बढ़ोतरी हुई है (२०११ और २०१४ के बीच). २०१४ में भारत में कैंसर के लगभग 44% रोगी मृत हुए. सीएनएस की निदेशक शोभा शुक्ला ने बताया कि "भारत में कैंसर रोगियों की संख्या २०११ में १०२८५०३ से बढ़कर 201४ में १११७२६९ हो गयी है. भारत में कैंसर द्वारा मृत्यु की संख्या भी २०११ में ४५२५४१ से बढ़कर २०१४ तक ४९१५९७ हो गयी है. कैंसर दर बढ़ने के अनेक कारण हैं जिनमें प्रमुख है तम्बाकू सेवन, असंतुलित आहार, जनसँख्या की आयुवृद्धि, और हानिकारक जीवनशैली."
यूपी में गैर-संक्रामक रोग कम होने के बजाय बढ़ोतरी पर
| शोभा शुक्ला, सीएनएस निदेशक |
यूपी में जन स्वास्थ्य के लिए मजबूत कदम: खुली सिगरेट स्टिक बेचने पर लगा प्रतिबन्ध, उल्लंघन करने पर जेल तक!
[English] उत्तर प्रदेश राज्य में सख्त तम्बाकू नियंत्रण नीति इसलिए भी अति आवश्यक है क्योंकि अधिकांश मौखिक तम्बाकू जनित कैंसर रोगी भी यहीं से आते हैं. हर तम्बाकू जनित असमय मृत्यु से बचाव मुमकिन है, हर तम्बाकू जनित रोग से बचा जा सकता है यदि तम्बाकू उद्योग का खेल समाप्त हो. "उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खुली सिगरेट स्टिक बिकने पर प्रतिबन्ध लगाना और उसको दंडनीय अपराध बनाने का हम स्वागत करते हैं क्योंकि यह जन स्वास्थ्य की ओर एक मजबूत कदम है. एक समाचार के अनुसार, खुली सिगरेट स्टिक बनाना और बेचना दोनों ही प्रदेश में दंडनीय अपराध है और जुर्माने के साथ साथ जेल तक की सजा तय की गयी है. उत्तर प्रदेश सरकार ने यह निरनेय पिछले माह ही ले लिया था और राज्यपाल द्वारा उसपर हस्ताक्षर करने से यह लागू हो गया है" कहा राहुल द्विवेदी ने, जो स्वास्थ्य को वोट अभियान का नेत्रित्र्व कर रहे हैं.
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