डॉ संदीप पाण्डेय, सीएनएस वरिष्ठ स्तंभकार और मग्सेसे पुरुस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता

महिला दिवस के पहले भारत ने एक उपलब्धि हासिल की। पहली बार सिर्फ महिला कर्मियों द्वारा संचालित एक एअर-इण्डिया वायुयान यात्रियों को दिल्ली से अमरीका के सैन-फ्रांसिसको तक ले गया और फिर वापस लाया। इसमें वायुयान के अंदर ही नहीं बाहर भी अभियंता आदि कर्मी सभी महिलाएं थीं।
क्या ये भारत में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है?
एअर-इण्डिया खुद ही अब कुछ सीटें महिलाओं के लिए अलग से रखता है क्यों कि
वर्ष के शुरू में महिलाओं के साथ हवाई यात्रा के दौरान छेड़-छाड़ की घटनाएं
सामने आईं थीं। देखा जाए तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की जो घटनाएं देश में
घटती हैं उसके आधार पर हम नहीं कह सकते कि देश में महिलाएं सुरक्षित हैं।
भारत में हरेक 3 मिनट में किसी महिला के साथ हिंसा की घटना होती है औा
हरेक 9 मिनट में हिंसा करने वाला पति या पति के परिवार का ही कोई व्यक्ति
होता है। दहेज के कारण मारी जाने वाली महिलाओं की संख्या प्रति वर्ष आठ
हजार से ऊपर होती है। प्रति वर्ष करीब पच्चीस हजार बलात्कार की घटनाएं होती
हैं जबकि बलात्कार की सारी घटनाएं दर्ज नहीं की जाती हैं। बलात्कार के
इरादे से किए गए हमले तो इसके करीब दोगुने होते हैं। बलात्कार के जो मामले
पुलिस दर्ज करती भी है तो उनमें से आरोपियों को सजा बहुत कम मामलों में मिल
पाती है। पति या पति के परिवार द्वारा महिला के खिलाफ हिंसा के एक लाख से
ज्यादा मामले होते हैं। चालीस हजार के करीब महिलाओं का प्रति वर्ष अपहरण हो
जाता है।