मासिक धर्म: स्वच्छता बनाम स्वस्थता

विकास द्विवेदी, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 
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यूनीसेफ का आंकड़ा है कि उत्तर प्रदेश में ८५% महिलाएं मासिक चक्र के समय पुराना अथवा गंदा कपड़ा इस्तेमाल करती हैं जिसके कारण उन्हें विभिन्न प्रकार की बीमारियों/संक्रमण का सामना करना पड़ता है। टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार पत्र की एक खबर के अनुसार उत्तर-प्रदेश सरकार २०१७ तक १००% माहवारी स्वच्छता को हासिल करेगी।

मासिक धर्म स्वच्छता का लड़कियों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर प्रभाव

मधुमिता वर्मा, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस – सीएनएस 
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आँकड़े बताते हैं कि मासिक धर्म स्वच्छता का सीधा सम्बन्ध न केवल किशोरियों के स्वास्थ्य वरन उनकी शिक्षा से भी है। इस प्रक्रिया के दौरान साफ़ सफाई न रखने के कारण अनेक प्रकार के संक्रमण  बीमारियाँ  होने का खतरा बना रहता है, जो कभी कभी जानलेवा भी हो सकता है। यूनीसेफ के एक सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में ८५% किशोरियां माहवारी के दौरान फटे पुराने कपड़ों का प्रयोग कर अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करती हैं। और उत्तर  प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की माने तो प्रदेश में हर साल २८ लाख।

युवा स्वर: मासिक धर्म सम्बंधित स्वच्छता के लिए आवश्यक है किशोरियों और महिलाओं का सशक्तिकरण

स्वास्थ्य सेवाओं में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के साथ भेदभाव क्यों?

प्रभजोत कौर, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस – सीएनएस 
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डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों को तो भगवान का स्वरुप माना जाता है  परन्तु जब ये भगवान के स्वरूप एच आई वी मरीज़ों को  हीनभावना से देखते हैं तो मनुष्यता पर से  विश्वास ही उठने लगता है  यह तो हम सभी जानते हैं कि एच आई वी से ग्रसित होने पर भी  दवाओं की मदद से एक सामान्य ज़िन्दगी जी जा सकती है  परन्तु समाज एवं डॉक्टर की प्रताड़ना को झेलना बहुत ही कठिन है. यह बात मैं अपने निजी जीवन के अनुभवों के आधार पर कह रही हूँ।

सरकारी अधिकारियों/ जन-प्रतिनिधियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़े

[English] इलाहबाद हाई कोर्ट ने १८ अगस्त २०१५ को सरकारी स्कूल की खस्ता हालत पर ध्यान देते हुए उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि सरकारी अधिकारियों/ सरकार से वेतन प्राप्त करने वाले लोग और जो जन प्रतिनिधि हैं या न्यायलय से जुड़े हैं उनके बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूल ही जाना पड़े. तब ही वे सरकारी स्कूल की गुणात्मकता बढ़ाने के बारे में संगीन होंगे.

मासिक धर्म शर्मसार होने की घटना नहीं, बल्कि स्वस्थ होने का प्राकृतिक संकेत है

शोभा शुक्ला, सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
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[English] यूपी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में २८ लाख किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल जाने में नागा करती हैं. मासिक धर्म सम्बन्धी अस्वच्छता से अनेक संक्रमण, सूजन, मासिक धर्म सम्बन्धी ऐठन, और योनिक रिसाव आदि स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएँ भी आती हैं. मासिक धर्म एक किशोरी या महिला के लिए प्राकृतिक स्वस्थ होने का संकेत है, न कि शर्मसार या डरने या घबड़ाने वाली कोई 'घटना'. सर्वे के अनुसार ८५% किशोरियां पुराने कपड़ों को ही मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल करती हैं.

युवा स्वर: युवा और एचआईवी एवं टीबी, पर प्रभ्ज्योत कौर की आवाज़


मासिक धर्म के प्रति अपराधबोध क्यों?

नीतू यादव, सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 
मासिक धर्म महिलाओं की प्रजनन क्षमता से सम्बंधित एक प्राक्रतिक प्रक्रिया है तथा उनके शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है. प्रत्येक किशोरी को इस नियमित प्रक्रिया के विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने का न केवल अधिकार वरन आवश्यकता भी है। परन्तु यह खेद का विषय है कि आज के आधुनिक युग में भी भारत वर्ष, विशेषकर उत्तर प्रदेश जैसे पिछड़े प्रांत, में इस महत्त्व पूर्ण विषय पर कोई भी बातचीत करना बहुत ही शर्मनाक माना जाता है।

स्वास्थ्य नीति में उद्योग के हस्तक्षेप को रोकें केंद्रीय मंत्रालय

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70 से अधिक जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कानून और न्याय, और संसदीय कार्य के केंद्रीय मंत्रालयों के हस्ताक्षर कर अभियान पत्र भेजा है कि जन स्वास्थ्य नीति में उद्योग के हस्तक्षेप को रोकने के लिये सख्त कदम उठाए जाएँ। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी संसदीय समितियों से उन सदस्यों को जिनका स्वास्थ्य-विकास मुद्दे से विरोधाभास है, उनको समिति से हटाने को कहा था।

दमा नियंत्रित रख कर सामान्य जीवन जिया जा सकता है

यदि अस्थमा या दमा के साथ जीवित लोग सफलतापूर्वक दमा नियंत्रित रखें तो सामान्य ज़िंदगी जी सकते हैं। इस साल की विश्व दमा दिवस की थीम है: आप दमा नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि दमा का कोई उपचार नहीं है पर सफलतापूर्वक नियंत्रण संभव है। इंटरनेशनल यूनियन अगेन्स्ट टूबेर्कुलोसिस एंड लंग डीजीस (द यूनियन) के विशेषज्ञों ने बताया कि अस्थमा नियंत्रण का सबसे बड़ा बाधक यह है कि अस्थमा संबन्धित दवाएं कम कीमित पर व्यापक रूप से हर देश में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। अस्थमा ड्रग फैसिलिटी ने यह प्रमाणित कर दिया है कि अस्थमा संबन्धित गुणात्मक दवाएं कम कीमत पर देशों में उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

मलेरिया उन्मूलन क्षेत्रीय एशिया-पैसिफिक नेटवर्क से अब भारत भी जुड़ा

भारत अब क्षेत्रीय एशिया पैसिफिक मलेरिया उन्मूलन नेटवर्क से जुड़ गया है जिसमें अभी तक 16 देश प्रतिभागी थे। भारत ने भी मलेरिया उन्मूलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। क्षेत्रीय मलेरिया उन्मूलन नेटवर्क के सदस्य के रूप में भारत पहली बार 24 मार्च को वियतनाम में होने वाली 7वीं सालाना बैठक में भाग लेगा। एशिया पैसिफिक क्षेत्र में मलेरिया पीड़ित लोगों के आंकड़े देखते हुए भारत दूसरे नंबर पर है जो अत्यंत चिंताजनक है। क्षेत्रीय नेटवर्क से जुडने से भारत ने भी 2030 तक मलेरिया समाप्त करने के लिए समर्पित है।

मदर टेरेसा जैसा काम क्यों नहीं करता संघ?

डॉ संदीप पाण्डेय, सीएनएस स्तंभकार
सीएनएस फोटो लाइब्ररी/2013
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और हिन्दुत्व की विचारधारा से जुड़े तमाम लोगों को नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब उन्हें वे बातें खुल कर कहने की छूट मिल गई है जो वे पहले नहीं कह पाते थे। इनमें से कई बातें विवादास्पद हैं। इधर अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थानों पर हमले भी बढ़ गए हैं। हमला करने वाले भी निडर हो गए हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि बराक ओबामा, जिन्हें नरेन्द्र मोदी अपना दोस्त बता कर लाए थे, ने भारत को धार्मिक सहिष्णुता की नसीहत दे डाली। वह भी एक बार नई दिल्ली में तो अमरीका वापस पहुंचने पर वाशिंग्टन डी.सी. में दूसरी बार।

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने पर सोशलिस्ट पार्टी का अनशन समाप्त हुआ

सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उन्नाव जिलाध्यक्ष अनिल मिश्रा के नेतृत्व में 8 जनवरी 2015 से हो रहे अनिश्चितकालीन अनशन 9 जनवरी 2015 को समाप्त हुआ जब उन्नाव के कुछ अन्न-क्रय केन्द्रों से खरीद आरंभ हो गयी। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने किसान-विरोधी भू-अधिग्रहण अध्यादेश की प्रतियाँ गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ पर 9 जनवरी को जलाईं।

गोष्ठी: "बापू हम शर्मिंदा हैं, आपके कातिल जिन्दा हैं"

फोटो साभार:रिहाई मंच
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने सीतापुर में आयोजित सभा में कहा कि: "गुजरात में सरदार पटेल की विशाल लौह प्रतिमा लगाने और पटेल जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस घोषित करने वाली मौजूदा केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि गांधी हत्या के मामले में उसका क्या नजरिया है? गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ? गांधी जी की हत्या में लगे लोग कौन थे ? किन संगठनों से जुडे़ थे, और किस जहरीली विचारधारा से पनपे थे।"

भू-अधिग्रहण कानून में अध्यादेश से लाए परिवर्तन की प्रति को जलाया

अनिल मिश्र के अनशन से प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद चालूसोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के उन्नाव जिलाध्यक्ष अनिल मिश्रा के 8 जनवरी, 2015 से गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ में अनशन पर बैठने से प्रदेश सरकार ने अंततः धान खरीद के जो केन्द्र बंद कर रखे थे उन्हें खोलने का निर्णय लिया है। अनिल मिश्रा ने सीएनएस को बताया कि: "किंतु हमें इस बात पर रोष है कि पूर्व में घोषित समर्थन मूल्य रु. 1360 (ए ग्रेड धान के लिए रु. 1400) प्रति कुंतल में 2 प्रतिशत, यानी रु. 27.20 की कमी कर दी गई है चूंकि फसल के खेत में खड़े रहने के दौरान वर्षा के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है।"

किसान-विरोधी नीति के खिलाफ अनिल मिश्रा अनशन पर

सीएनएस फोटो लाइब्ररी/2015
उत्तर प्रदेश में इस समय किसान को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य रुपये 1360 प्रति क्विंटल 'ब' ग्रेड और 1400 रुपये प्रति क्विंटल 'आ' ग्रेड कहीं नहीं मिल रहा है। ज़्यादातर क्रय केंद्र बंद पड़े हैं। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उन्नाव जिला-अध्यक्ष अनिल मिश्रा 24 नवंबर 2014 तथा 15 दिसम्बर 2014 को जब जिला मुख्यालय पर बैठे तो 10 केंद्र खोले गए, किन्तु खरीद कहीं भी शुरू नहीं हुई। अत: अनिल मिश्रा ने राज्य की राजधानी में गांधी प्रतिमा हजरतगंज में 8 जनवरी 2015 से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का निर्णय लिया है। इनके अनशन की घोषणा के बाद भी जिला अधिकारी उन्नाव के आदेश पर सिर्फ रुपये 1332 प्रति क्विंटल की दर से आज भुगतान हुआ है।

प्रथम सर्व-व्यापी स्वास्थ्य सेवा दिवस: उप्र में सबके-लिए स्वास्थ्य का सपना कब पूरा होगा?

सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 
[English] हालांकि हर नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य भारत सरकार का एक अरसे से रहा है, परंतु हकीकत यह है कि समाज का एक बड़ा तबका जानलेवा रोगों से जूझ रहा है जिनमें से अधिकांश से बचाव मुमकिन था, और यदि वो स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर पाता है तो खर्चे की वजह से गरीबी की ओर ढकल जाता है।

भारत एवं अन्य पूर्वी एशिया देशों ने 2030 तक मलेरिया समाप्ति का वादा किया

फोटो क्ष्रेय: एपीएलएमए
[English] 18 पूर्वी एशिया देशों के प्रमुखों के साथ भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र से मलेरिया को समाप्त करने का वादा किया। यह निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति नेतृत्व दर्शाता है कि मलेरिया उपचार की प्रमुख दवा आर्टीमिसिनीन से बढ़ती प्रतिरोधकता पर संभवत: अंकुश लग सकेगा।

178 देशों के साथ भारत ने तंबाकू कर नीति को पारित किया

178 देशों के साथ भारत ने आज विश्व तंबाकू नियंत्रण संधि की बैठक में विश्व व्यापी मजबूत तंबाकू कर नीति को पारित किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त सर्जन प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "अनेक शोध के अनुसार, तंबाकू कर बढ़ाने से दोहरा लाभ होता है: तंबाकू सेवन, विशेषकर में नए तंबाकू व्यसनी के दर में गिरवाट आती है, और तंबाकू जनित रोगों के उपचार आदि में हो रहे व्यय में भी कमी आती है। सरकार को अधिक राजस्व भी प्राप्त होता है।"

समान शिक्षा प्रणाली लागू हो: डॉ संदीप पाण्डेय

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने सरकारी तनख्वाह लेने वाले व जन प्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय में पढ़ना अनिवार्य हो की मांग को ले कर एक हफ्ते के अभियान का समापन किया। इस दौरान बेसिक शिक्षा निदेशालय, निशातगंज, माध्यमिक शिक्षा कार्यालय, पार्क रोड व बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जगत नारायण रोड के सामने भी प्रदर्शन किए। 30 सितम्बर से 6 अक्टूबर, 2014 तक रोज दिन में 11 बजे से 12 बजे तक प्रदर्शन हुए।

घरेलू वायु प्रदूषण भी खतरा है फेफड़े के स्वास्थ्य के लिए

घर के बाहर के प्रदूषण के खतरे से तो हम लोग चेते हुए हैं पर घर के भीतर वायु प्रदूषण हमारे फेफड़े के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसकी जागरूकता कम है। डॉ सूर्य कान्त, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, पलमोनरी मेडिसिन विभाग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने बताया कि: “परोक्ष तंबाकू धूम्रपान से और लकड़ी आदि के चूल्हे के धुए से हमारे फेफड़े के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। टूबेर्कुलोसिस (क्षय रोग) होने का खतरा बढ़ता है, अस्थमा या दमा बिगड़ने की संभावना बढ़ती है। इसीलिए तंबाकू सेवन न करें, और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और स्वच्छ चूल्हों का ही उपयोग करें”।

योजना आयोग विवाद : योजना और शासन का विकेंद्रीकरण हो, न कि निजीकरण

सोशलिस्ट पार्टी ने कई बार योजना आयोग की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया हैा क्‍योंकि योजना आयोग की स्‍थापना संविधान लागू हो जाने के सात सप्‍ताह बाद केबिनेट ने  एक प्रस्‍ताव के जरिए की थीा आजादी के शुरूआती दौर में योजना आयोग की एक प्रस्‍ताव की मार्फत स्‍थापना की कुछ सार्थकता बनती थी क्‍योंकि सरकार के प्रस्‍ताव में कहा गया था कि योजना निर्माण का काम संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और राज्‍य के नीति-निर्देशक तत्‍वों की रोशनी में किया जाएगाा प्रस्‍ताव में आगे इस बात पर बल दिया गया था कि योजना आयोग की सफलता सभी स्‍तरों पर लोगों की सहभागिता के आधार पर काम करने पर निर्भर करेगी।