किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलने पर सोशलिस्ट पार्टी का अनशन समाप्त हुआ

सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उन्नाव जिलाध्यक्ष अनिल मिश्रा के नेतृत्व में 8 जनवरी 2015 से हो रहे अनिश्चितकालीन अनशन 9 जनवरी 2015 को समाप्त हुआ जब उन्नाव के कुछ अन्न-क्रय केन्द्रों से खरीद आरंभ हो गयी। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने किसान-विरोधी भू-अधिग्रहण अध्यादेश की प्रतियाँ गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ पर 9 जनवरी को जलाईं।

गोष्ठी: "बापू हम शर्मिंदा हैं, आपके कातिल जिन्दा हैं"

फोटो साभार:रिहाई मंच
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के कार्यकर्ताओं ने सीतापुर में आयोजित सभा में कहा कि: "गुजरात में सरदार पटेल की विशाल लौह प्रतिमा लगाने और पटेल जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस घोषित करने वाली मौजूदा केंद्र सरकार से यह सवाल पूछा जाना जरूरी है कि गांधी हत्या के मामले में उसका क्या नजरिया है? गोडसे अगर राष्ट्रभक्त है तो गांधी जी क्या हैं ? गांधी जी की हत्या में लगे लोग कौन थे ? किन संगठनों से जुडे़ थे, और किस जहरीली विचारधारा से पनपे थे।"

भू-अधिग्रहण कानून में अध्यादेश से लाए परिवर्तन की प्रति को जलाया

अनिल मिश्र के अनशन से प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीद चालूसोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के उन्नाव जिलाध्यक्ष अनिल मिश्रा के 8 जनवरी, 2015 से गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ में अनशन पर बैठने से प्रदेश सरकार ने अंततः धान खरीद के जो केन्द्र बंद कर रखे थे उन्हें खोलने का निर्णय लिया है। अनिल मिश्रा ने सीएनएस को बताया कि: "किंतु हमें इस बात पर रोष है कि पूर्व में घोषित समर्थन मूल्य रु. 1360 (ए ग्रेड धान के लिए रु. 1400) प्रति कुंतल में 2 प्रतिशत, यानी रु. 27.20 की कमी कर दी गई है चूंकि फसल के खेत में खड़े रहने के दौरान वर्षा के कारण उसकी गुणवत्ता प्रभावित हुई है।"

किसान-विरोधी नीति के खिलाफ अनिल मिश्रा अनशन पर

सीएनएस फोटो लाइब्ररी/2015
उत्तर प्रदेश में इस समय किसान को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य रुपये 1360 प्रति क्विंटल 'ब' ग्रेड और 1400 रुपये प्रति क्विंटल 'आ' ग्रेड कहीं नहीं मिल रहा है। ज़्यादातर क्रय केंद्र बंद पड़े हैं। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उन्नाव जिला-अध्यक्ष अनिल मिश्रा 24 नवंबर 2014 तथा 15 दिसम्बर 2014 को जब जिला मुख्यालय पर बैठे तो 10 केंद्र खोले गए, किन्तु खरीद कहीं भी शुरू नहीं हुई। अत: अनिल मिश्रा ने राज्य की राजधानी में गांधी प्रतिमा हजरतगंज में 8 जनवरी 2015 से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठने का निर्णय लिया है। इनके अनशन की घोषणा के बाद भी जिला अधिकारी उन्नाव के आदेश पर सिर्फ रुपये 1332 प्रति क्विंटल की दर से आज भुगतान हुआ है।

प्रथम सर्व-व्यापी स्वास्थ्य सेवा दिवस: उप्र में सबके-लिए स्वास्थ्य का सपना कब पूरा होगा?

सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 
[English] हालांकि हर नागरिक के लिए स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य भारत सरकार का एक अरसे से रहा है, परंतु हकीकत यह है कि समाज का एक बड़ा तबका जानलेवा रोगों से जूझ रहा है जिनमें से अधिकांश से बचाव मुमकिन था, और यदि वो स्वास्थ्य सेवा प्राप्त कर पाता है तो खर्चे की वजह से गरीबी की ओर ढकल जाता है।

भारत एवं अन्य पूर्वी एशिया देशों ने 2030 तक मलेरिया समाप्ति का वादा किया

फोटो क्ष्रेय: एपीएलएमए
[English] 18 पूर्वी एशिया देशों के प्रमुखों के साथ भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2030 तक पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र से मलेरिया को समाप्त करने का वादा किया। यह निर्णय स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति नेतृत्व दर्शाता है कि मलेरिया उपचार की प्रमुख दवा आर्टीमिसिनीन से बढ़ती प्रतिरोधकता पर संभवत: अंकुश लग सकेगा।

178 देशों के साथ भारत ने तंबाकू कर नीति को पारित किया

178 देशों के साथ भारत ने आज विश्व तंबाकू नियंत्रण संधि की बैठक में विश्व व्यापी मजबूत तंबाकू कर नीति को पारित किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार प्राप्त सर्जन प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "अनेक शोध के अनुसार, तंबाकू कर बढ़ाने से दोहरा लाभ होता है: तंबाकू सेवन, विशेषकर में नए तंबाकू व्यसनी के दर में गिरवाट आती है, और तंबाकू जनित रोगों के उपचार आदि में हो रहे व्यय में भी कमी आती है। सरकार को अधिक राजस्व भी प्राप्त होता है।"

समान शिक्षा प्रणाली लागू हो: डॉ संदीप पाण्डेय

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने सरकारी तनख्वाह लेने वाले व जन प्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय में पढ़ना अनिवार्य हो की मांग को ले कर एक हफ्ते के अभियान का समापन किया। इस दौरान बेसिक शिक्षा निदेशालय, निशातगंज, माध्यमिक शिक्षा कार्यालय, पार्क रोड व बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, जगत नारायण रोड के सामने भी प्रदर्शन किए। 30 सितम्बर से 6 अक्टूबर, 2014 तक रोज दिन में 11 बजे से 12 बजे तक प्रदर्शन हुए।

घरेलू वायु प्रदूषण भी खतरा है फेफड़े के स्वास्थ्य के लिए

घर के बाहर के प्रदूषण के खतरे से तो हम लोग चेते हुए हैं पर घर के भीतर वायु प्रदूषण हमारे फेफड़े के लिए कितना खतरनाक हो सकता है इसकी जागरूकता कम है। डॉ सूर्य कान्त, प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष, पलमोनरी मेडिसिन विभाग, किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने बताया कि: “परोक्ष तंबाकू धूम्रपान से और लकड़ी आदि के चूल्हे के धुए से हमारे फेफड़े के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है। टूबेर्कुलोसिस (क्षय रोग) होने का खतरा बढ़ता है, अस्थमा या दमा बिगड़ने की संभावना बढ़ती है। इसीलिए तंबाकू सेवन न करें, और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और स्वच्छ चूल्हों का ही उपयोग करें”।

योजना आयोग विवाद : योजना और शासन का विकेंद्रीकरण हो, न कि निजीकरण

सोशलिस्ट पार्टी ने कई बार योजना आयोग की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाया हैा क्‍योंकि योजना आयोग की स्‍थापना संविधान लागू हो जाने के सात सप्‍ताह बाद केबिनेट ने  एक प्रस्‍ताव के जरिए की थीा आजादी के शुरूआती दौर में योजना आयोग की एक प्रस्‍ताव की मार्फत स्‍थापना की कुछ सार्थकता बनती थी क्‍योंकि सरकार के प्रस्‍ताव में कहा गया था कि योजना निर्माण का काम संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और राज्‍य के नीति-निर्देशक तत्‍वों की रोशनी में किया जाएगाा प्रस्‍ताव में आगे इस बात पर बल दिया गया था कि योजना आयोग की सफलता सभी स्‍तरों पर लोगों की सहभागिता के आधार पर काम करने पर निर्भर करेगी।

मोदी के दावे खोखले: साबरमती की सफाई का सच

[English] सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) जो पश्चिमी देशों की “ग्रीन पार्टी” के तर्ज़ पर पर्यावरण को विकास से मूलत: जुड़ा हुआ मानती है और भारत की “ग्रीन पार्टी” के रूप में पहचान दर्ज कर रही है, उसका मानना है कि भाजपा के प्रधान मंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी कोई पहले व्यक्ति नहीं जो गंगा की सफाई की बात कर रहे हैं। यह बात अरविंद केजरीवाल भी कर चुके हैं और राजीव गांधी ने गंगा एक्शन प्लान की 1986 में शुरुआत करके की थी।

नरेन्द्र मोदी गंगा में किस नदी का पानी डालेंगे?

नरेन्द्र मोदी ने दावा किया है कि जिस तरह उन्होंने साबरमती नदी को ठीक किया है उसी तरह वे गंगा को भी ठीक कर देंगे। यह दावा अहंकार से भरपूर है और पूरी सच्चाई बयान नहीं करता। साबरमती नदी गंगा की तुलना में बहुत छोटी नदी है। क्या साबरमती नदी पर जनसंख्या और गंदगी का इतना बोझ है जितना गंगा पर पड़ता है? दूसरा नरेन्द्र मोदी यह नहीं बता रहे हैं कि साबरमती में नर्मदा, जो एक बड़ी नदी है, का पानी डाला जाता है।

अस्थमा प्रबंधन से सामान्य जीवन मुमकिन

शोभा शुक्ला - सीएनएस
[English] अस्थमा या दमा एक आम गैर-संक्रामक रोग है जिससे 30 करोड़ से अधिक लोग विश्व में जूझ रहे हैं। भारत में 3 करोड़ लोग अस्थमा के साथ जीवित हैं। बच्चों में अस्थमा सबसे प्रचलित गैर-संक्रामक रोग है। अनेक देशों में अस्थमा दर दोगुना तक हो गया है। यदि अस्थमा का प्रबंधन और नियंत्रण पर्याप्त रूप से हो तो उसके साथ सामान्य ज़िंदगी बिताई जा सकती है और व्यावसायिक रूप से भी सफलता पायी जा सकती है। यही केन्द्रीय विचार था इन्दिरा नगर में आयोजित मीडिया संवाद का जिसको विश्व अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य को वोट अभियान, सीएनएस, आशा परिवार और जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय ने आयोजित किया था।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) गैस का मूल्य दोगुणा करने के सरकारी फैसले के खिलाफ

पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने चुनाव के बीच में ही गैस के मूल्य को चुनाव के तुरंत बाद एक अधिसूचना जारी कर दोगुणा करने का फैसला ले लिया है। मुख्य बात यह है कि यह मूल्य वृद्धि 1 अप्रैल, 2014 से प्रभावी मानी जाएगी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने चुनाव आयोग व प्रधान मंत्री को पत्र लिख इस अवैध आदेश को रोकने की मांग की है। सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ संदीप पाण्डेय ने कहा कि जनसत्ता अखबार को छोड़ यह खबर कहीं छपी नहीं। ऐसा क्यों?

यूपी महिला कल्याण निगम प्रमुख को निष्कासित किया जाये: सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) की मांग

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने यूपी महिला कल्याण निगम प्रमुख सुश्री लीलावती कुशवाहा को निष्कासित करने की मांग की है क्योंकि उनका सुश्री मायावती के बारे में बयान अत्यंत असंवेदनशील है। सोशलिस्ट महिला सभा की अध्यक्ष मीरा वर्धन ने कहा कि "हमारा मानना है कि सुश्री लीलावती जैसे कुंठित महिला कल्याण विचारधारा जैसे लोग महिला कल्याण से संबन्धित नहीं होने चाहिए।"

मिश्रिख से सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) के उम्मीदवार हैं हरिनाम

वर्तमान लोक सभा चुनाव में विभिन्न किस्म की पार्टियां सक्रिय हैं। कुछ धर्म के आधार पर समाज को बांटने वाली साम्प्रदायिक शक्तियों को बढ़ावा देती हैं तो दूसरी ओर पूंजीवाद की हितैषी हैं। पूंजीवादी पार्टियां इस देश के किसान-मजदूर-गरीब के खिलाफ फैसले लेती हैं। सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) धर्म, जाति, वर्ग, लिंग, आदि मानव निर्मित विभाजनों से ऊपर उठकर समतामूलक समाज स्थापित करने व हरेक इंसान की बराबरी व सम्मान के सिद्धांत में विश्वास करती है।

विश्व बैंक पानी निजीकरण को बंद करे: संगठनों की मांग

[English] पानी-अधिकार संस्थाओं ने विश्व बैंक से आह्वान किया कि वे विकास की आड़ में पानी निजीकरण करना बंद करे. इंटरनेशनल फ़ाइनेंस कार्पोरेशन (आईएफ़सी) के जरिये विश्व बैंक विकासशील देशों में पानी निजीकरण के प्रोजेक्ट को समर्थन देता आ रहा है। हालांकि अधिकांश ऐसे प्रोजेक्ट या तो संघर्ष कर रहे हैं या असफल हो गए हैं परंतु विश्व बैंक इनको ‘सफल’ प्रोजेक्ट की तरह ही मानता आ रहा है।

तंबाकू सेवन से टीबी दुबारा होने का खतरा दोगुना: नया शोध

[English] 24 मार्च 2014 को प्रकाशित नए शोध पत्र के अनुसार तंबाकू सेवन से टूबेर्कुलोसिस (टीबी, तपेदिक या क्षय रोग) होने का खतरा दो-गुना हो जाता है।  जिन लोगों ने टीबी का इलाज पूरा कर लिया है और पूर्णत: ठीक हो गए हैं यदि वे तंबाकू सेवन करेंगे तो टीबी रोग दोबारा होने का खतरा दोगुना होता है। यह शोध अब तक का सबसे ठोस चिकित्सकीय वैज्ञानिक प्रमाण है कि तंबाकू सेवन और टीबी में सीधा और खतरनाक संबंध है। यह शोध पत्र “इंटरनेशनल जर्नल ऑफ टूबेर्कुलोसिस एंड लंग डीजीस” के अप्रैल 2014 अंक में प्रकाशित हुआ है जो आज विश्व टीबी दिवस पर ऑनलाइन हुआ।

कैसे मदद करे उन 30 लाख टीबी रोगियों की जिनतक सेवाएँ नहीं पहुँच रही हैं

[English] इस साल विश्व तपेदिक (टीबी) दिवस का मुख्य ज़ोर है कि कैसे 30 लाख टीबी रोगियों तक पहुंचा जाये जिनतक टीबी सेवाएँ नहीं पहुँच पा रही हैं। ये वो 30 लाख टीबी रोगी हैं जिनकी या तो टीबी जांच तक नहीं हो पाती है, या जिन तक इलाज नहीं पहुँच पाता है।  डॉ मारिया मोंटेस डे ओका जो “फॉरम फॉर इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज़” (एफ़आईआरएस) की अध्यक्ष हैं, उनका कहना है कि “एफ़आईआरएस 70,000 श्वास संबंधी संस्थाओं का संगठन है और वे प्रतिबद्ध हैं कि कैसे मदद करें और 30 लाख ऐसे टीबी रोगियों को खोजे और सेवाएँ पहुंचाए जो इनसे वंचित हैं”। डॉ ओका का कहना है कि हर टीबी रोगी को मानक के अनुसार टीबी जांच और इलाज प्राप्त होना चाहिए तभी टीबी नियंत्रण संभव है।

सरकार द्वारा टीबी दवाओं के विक्रय को विधिवत नियंत्रित करना जन-हितैषी कदम

1 मार्च 2014 से भारत सरकार ने ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक अधिनियम 1940 में संशोधन करके 46 ऐन्टीबाइओटिक दवाओं को, बिना चिकित्सकीय परामर्श के बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन 46 ऐन्टीबाइओटिक दवाओं में टीबी की दवाएं भी शामिल हैं। टीबी नियंत्रण के लिए उत्तर प्रदेश राज्य टास्क फोर्स के अध्यक्ष एवं इंडियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ सूर्य कान्त का कहना है कि “सरकार इस जन हितैषी और जन-स्वास्थ्य हितैषी कदम के लिए बधाई का पात्र है। टीबी दवाओं की बे-रोकटोक बिक्री पर बहुत पहले ही प्रतिबंध लगना चाहिए था। अनियमित टीबी दवाएं लेने से दवा-प्रतिरोधक टीबी उत्पन्न हो सकती है इसलिए टीबी दवाओं के साथ-साथ 45 अन्य ऐन्टीबाइओटिक दवाओं को “शैड्यूल एच1” में शामिल करके, उनको बिना चिकित्सकीय परामर्श के बेचने पर रोक लगाने का यह कदम सराहनीय है”।

सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) ने पूर्वांचल से बनाया जन आंदोलनों के नेताओं को उम्मीदवार

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), जो गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में विश्वास करती है ने पूर्वांचल की दो सीटों से लोक सभा चुनाव हेतु उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सोशलिस्ट पार्टी के कुलदीप नैयर, न्यायमूर्ति राजिन्दर सच्चर, गिरीश कुमार पाण्डेय, ओंकार सिंह, संदीप पाण्डेय, एवं बॉबी रमाकांत ने बताया कि कुशीनगर सीट से मैत्रेय परियोजना के खिलाफ किसानों के आंदोलन का नेतृत्व करने वाले जुझारु नेता गोवर्द्धन प्रसाद गोंड़ को उम्मीदवार बनाया है।

अधिकतम चुनाव खर्च सीमा को बढ़ाना जन विरोधी

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा अधिकतम चुनाव खर्च सीमा को 25 लाख रुपए से बढ़ा कर 70 लाख रुपए करना और जमानत राशि 10 हज़ार रुपए से बढ़ा कर 25 हज़ार करना जन विरोधी है। अधिकतम चुनाव खर्च सीमा और जमानत राशि को बढ़ाने से अमीर पैसे वाले उम्मीदवारों और पार्टियों के लिए ही चुनाव लड़ना आसान होगा और अधिकांश गरीब जनता के लिए अत्यंत मुश्किल।

अन्य पाटियों जैसी बनती जा रही आप

(दैनिक जागरण में 16 मार्च 2014 को सर्वप्रथम प्रकाशित)
भारतीय जनता पार्टी शुरु में दावा करती थी कि वह अलग किस्म की पार्टी है। मुख्य रुप से उसका दावा था कि उसके अंदर भ्रष्ट लोग नहीं हैं और वह अपराधियों को सदस्य नहीं बनाती। किंतु धीरे-धीरे उसने यह दावा करना बंद कर दिया और उसकी राजनीति भी भ्रष्टाचार और अपराधीकरण का शिकार हो गई। अब आम आदमी पार्टी आई है जो एक अलग किस्म का दल होने का दावा कर रही है। अभी उसको अस्तित्व में आए डेढ़ साल भी नहीं हुए और जिन चीजें को चुनौती देने के लिए यह पार्टी बनाई गई थी वह उसी राह पर चल पड़ी है।