पोषण एवं स्वच्छता का ध्यान रखें, बच्चों को निमोनिया से बचाएं

गर्भावस्था से ही पोषण और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए  तो जन्म के बाद नवजात शिशु में होने वाली निमोनिया जैसी बीमारियों से बच्चे की सुरक्षा की जा सकती है, और बच्चे को स्वस्थ रखा जा सकता है | निमोनिया पांच साल तक के बच्चों में होने वाली एक आम बीमारी है जिससे, अगर माँ चाहे तो अपने बच्चे को सुरक्षित रख सकती है। जरूरत है तो सिर्फ थोड़ी सी जागरूकता की, और शिशु जन्म से पूर्व ही इसके लिए तैयारी करने की।

स्त्री रोग विशेषज्ञा डा. रमा शंखधर के अनुसार ‘‘जब महिला गर्भवती होती है तो उसे हम सलाह देते है कि आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन आदि की गोली लें और खाने में ऐसी चीजें खाए जिनमें प्रोटीन होता है, जैसे सोयाबीन, और गुड़, जिसमें आयरन बहुत होता है। गुड़ आयरन का बहुत अच्छा स्त्रोत है, और शहर एवं गांव दोनों जगह आसानी से मिल भी जाता है | यह महंगा भी नही होता है। साथ ही पनीर और दूध भी लें जिसमें प्रोटीन और कैल्शियम दोनों होता है। अगर माँ को अच्छा पोषण देगें तो बच्चा स्वस्थ पैदा होगा। इससे एक फायदा और होता है कि बच्चा समय से पहले नही होता है। जब बच्चा समय पर होगा तो बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है।’’

डा. शंखधर ने यह भी बताया कि ‘‘साफ सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिये. बच्चे को गोद में उठाने से पहले साबुन से हाथ धो लें, और स्तनपान कराने से पहले अपने स्तन को गीले तौलिये से पोंछ लें, जिससे पसीने या फिर अगर पाउडर या क्रीम आदि लगाती हैं  तो यह बच्चे के मुँह में न जाये| माँ को रोज नहाना चाहिये,  एवं बच्चे को भी रोज नहलाकर उसके कपड़े बदलने चाहिए। हर बार पेशाब आदि करने पर बच्चे के कपड़े बदलें और गंदे कपड़ों को साबुन से धोकर और ठीक से सुखाकर ही उन्हें पहनाएं | कभी भी गीले कपड़े बच्चे को न पहनाएं। साथ ही जब बच्चा थोड़ा बड़ा हो जाय और कुछ खाने लगे तो ध्यान रखें कि उन्हें बाहर की चीज़े न दें | केवल घर की बनी चीज़ें ही उन्हें दें और मिर्च मसाले की चीज़ों से बच्चों को दूर रखें ।’’

डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ  डा. अभिषेक वर्मा बच्चों के पोषण के बारे में बताते हैं कि ‘‘जो हमारे शरीर के आवश्यक  तत्व हैं, जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा आदि, वो एक निश्चित मात्रा में हमारे शरीर के हिसाब से जरूरी हैं | जब वो सही मात्रा में शरीर को प्राप्त हों तो उसे हम अच्छा पोषण कहते हैं। अगर हम बच्चे को गुणकारी आहार देते हैं, जिसमें हर तरह की रक्षात्मक चीजें मौजूद हों, तो उससे शरीर की अवरोधक क्षमता बढ़ती है। वह सीधे तो निमोनिया को नहीं रोक सकती है, लेकिन शरीर को निमोनिया से लड़ने की शक्ति जरूर प्रदान करती हैं, और वह उचित खाने से ही आती हैं। तो निश्चित रूप से एक गुणकारी आहार से शरीर को हर तरह की बीमारी से बचाने में मदद मिलती है।’’

प्रत्येक महिला जब वह गर्भावस्था में होती है तो उसका यह सपना होता है कि उसका होने वाला बच्चा स्वस्थ एवं तंदुरूस्त हो, और जन्म के बाद सभी तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहे। यदि वह अपने सपने को साकार करना चाहती हैं तो गर्भावस्था से ही अपने और बच्चे के पोषण का ध्यान रखे जिससे गर्भ में पल रहे बच्चे का ठीक से विकास हो सके, और बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान कराने के लिए भी आवश्यक तत्व मिल सकें। इसके लिए यदि संभव हो तो माँ  को दूध, अण्डे, मछली और मांस आदि दें जिससे उसे प्रोटीन पूरी मात्रा में मिल सके। यदि शाकाहारी हैं तो इसके लिए अनाज और दालों का प्रयोग कर सकती हैं। चीनी के स्थान पर गुड़ का प्रयोग करें और कैल्शियम के लिए बाजरे का प्रयोग करें। विटामिन के लिए हरे पत्ते वाली सब्जी का प्रयोग कर सकते हैं। इस प्रकार यदि गर्भावस्था से ही पोषण का ख्याल रखेंगें तो जन्म के बाद माँ के दूध के द्वारा बच्चे को वे सभी आवश्यक तत्व मिल जायेंगें जो बच्चे को निमोनिया जैसी बीमारी से लड़ने मे सहायता करेंगे और बच्चा स्वस्थ रहेगा।

नदीम सलमानी - सी.एन.एस.
(लेखक, ऑनलाइन पोर्टल सी.एन.एस. www.citizen-news.org के लिये लिखते हैं)

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