चुनाव पर नज़र यात्रा दिल्ली पहुंची

चुनाव पर नज़र यात्रा दिल्ली पहुंची

मुंबई, गाजियाबाद, हिमाचल प्रदेश, रांची, छिंदवाडा, आदि जगहों से होती हुई और लोगों से जुड़े हुए मुद्दों को उठती हुई 'चुनाव पर नज़र यात्रा' १५ अप्रैल २००९ को दिल्ली पहुंची है. इस यात्रा के माध्यम से शहरों में रहने वाले लाखों गरीबों के, अव्यवस्थित छेत्र में कार्यरत लोगों के, बस्तियों में रहने वालों के, जमीन-रहित किसानों के, और अन्य समाज के हाशिए पर जीवित लोगों के जीवन से जुड़े हुए मुद्दें उठ रहे हैं.

दिल्ली में १५ अप्रैल २००९ को लोक मंच का आयोजन हुआ जिसमें धरना स्थल पर हज़ारों लोग एकत्रित हुए और खंज़वाला भूमि बचाओ आन्दोलन, जो १७०० से बसा हुआ गाँव है, के प्रति समर्थन व्यक्त किया. इस गाँव पर भूमि-माफियाओं की नज़र गड़ी हुई है.

इन लोगों ने टेकरी कला, कराला और टेकरी खुर्द गाँव जो ९०० साल पुराने हैं, उनके लोगों के साथ भूमि माफियाओं का खंडन किया और विभिन्न राजनीति दलों के प्रतिनिधियों से यह पूछा कि आगामी लोक सभा चुनाव २००९ में किस तरह से उनके जीवन और रोज़गार से जुड़े हुए मुद्दे उठ रहे हैं. इन लोगों ने राजनीतिक प्रतिनिधियों को उनके खोखले वादों की भी याद दिलाई जो उन्होंने २००४ में दिल्ली विकास प्राधिकरण और डी.एस.आई.डी.सी से सम्बंधित अनियंत्रित और मनमाना भूमि अधिग्रहण के मामले में किए थे.

यह अभियान अनेकों संस्थाओं के सामूहिक योगदान का फल है, जिसमें जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, जन संघर्ष वाहिनी, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन, दिल्ली सोलिडरिटी ग्रुप, बंधुआ मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय कर्मचारी संगठन, राष्ट्रीय घर-में कार्यरत लोगों के संगठन, दिल्ली फोरम, CACIM, युवाओं का संगठन, स्थायी लोकतंत्र का संस्थान, शहरों में कार्यरत महिलाओं का संगठन, जन संघर्ष संयुक्त मोर्चा और अन्य संगठन भी शामिल हैं.

अनेकों लोगों ने इस 'लोक मंच' कार्यक्रम में भाग लिया जिसमें मध्य प्रदेश सरकार के भूतपूर्व प्रमुख सचिव, श्री शरद चंद्र बहार, इंडियन सोशल साइंस अकेडमी के डॉ मेहर इंजीनियर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के अर्थनीति विभाग के डॉ अमित बहादुरी, मग्सय्सय पुरुस्कार से सम्मानित और सूचना के अधिकार पर कार्यरत अरविन्द केजरीवाल, नर्मदा बचाओ आन्दोलन और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय की मेधा पाटकर, दिल्ली यूनिवर्सिटी के आचार्य अजित झा, राजनीतिक अर्थनीति विशेषज्ञ आचार्य अरुण कुमार, वरिष्ठ पत्रकार सुहास बोरकर, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय से राजेंद्र रवी आदि शामिल थे.

विभिन्न शहरों में इस अभियान से चुनाव आयोग के भूतपूर्व सलाहाकार, के जगन्नाथ राव, असोसिअशन फॉर डेमोक्रेटिक रेफोर्म के त्रिलोचन शास्त्री जो भारतीय प्रबंधन संस्थान के 'डीन' भी हैं, मुंबई हाई कोर्ट के सेवा निवृत न्यायाधीश सुरेश, रांची विश्वविद्यालय के भूतपूर्व कुलपति आचार्य राम दयाल मुंडा, इंसाफ से दयामनी बिरला, किसान संघर्ष समिति से डॉ सुनीलम, जंगल बचाओ अभियान से संजय बासु मल्लिक, आई.ए.एस अधिकारी आभा सिंह और अन्य लोग भी जुड़े.

कांग्रेस पार्टी की श्रीमती कृष्ण तीरथ, भारतीय जनता पार्टी की श्रीमती मीरा कावारिया, और बहुजन समाज पार्टी से श्री राकेश हंस ने लोगों से जुड़े हुए मुद्दों के प्रति अपनी-अपनी पार्टी की भूमिका रखी.

हमारा मानना है कि असली लोकतंत्र तभी मुमकिन है जब विकेंद्रीकरण हो. बस्ती सभा, जिनमें हर शहर से ३००० परिवार जुड़े होते हैं, और ग्राम सभा, ही हर निर्णय-लेने की प्रक्रिया का आधार होने चाहिए.

हम सामाजिक आंदोलनों ने जन भागीदारी बिल प्रस्तावित किया है और हर राजनीतिक दल से हमारा अनुरोध है कि वोह अपनी टिपण्णी इस पर दें.

वर्त्तमान विकास की अवधारणा जिसमें गरीब लोगों का विस्थापन हो रहा है और उनके रोज़गार के अवसर समाप्त हो रहे हैं, हम लोगों के जन आन्दोलन, इन्हीं विस्थापित और बेरोजगार हुए लोगों के लिए संघर्ष करके और उनके लिए निर्माण की नीति को अपना कर ही सशक्त होते आए हैं.

निर्मला बहन, मधुरेश, अनीता कपूर, भूपेंद्र रावत, नान्हू गुप्ता

No comments: