स्वच्छ पर्यावरण से एक-तिहाई मृत्यु दर कम हो सकता है

स्वच्छ पर्यावरण से एक-तिहाई मृत्यु दर कम हो सकता है

"विकासशील देशों में असंतुलित पर्यावरण से कम-से-कम एक तिहाई मृत्यु दर कम हो सकता है. सही ढंग से पर्यावरण के संतुलन का ख्याल रखने से इन बीमारियों से बचाव मुमकिन है," कहना है प्रभा चतुर्वेदी का जो एक्स्नोरा लखनऊ संस्था की अध्यक्ष हैं. नवयुग पब्लिक स्कूल, चंदर नगर, आलमबाग में आज पर्यावरण और स्वास्थ्य पर आयोजित परिचर्चा में प्रभा चतुर्वेदी मुख्या वक्ता थीं.

उन्होंने कहा कि सड़नशील कूड़े को जमीन के नीचे गाड़ देना चाहिए जिससे कि वोह प्राकृतिक तरीके से खाद में परिवर्तित हो सके. जो कूड़ा सड़नशील नहीं है, उसको इकठ्ठा कर के कूड़ा बीनने वालों के हवाले कर देना चाहिए, कहना है प्रभा चतुर्वेदी का.

नवयुग पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती अनुप्रिया दयाल ने स्कूल में प्रकृति एवं स्वास्थ्य क्लब बनाने की घोषणा की और स्कूल के उपवन को एक पर्यावरण संतुलन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की बात रखी।

"पर्यावरण से हमारे स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ता है. १ करोड़ ३० लाख मृत्यु प्रति वर्ष पर्यावरण असंतुलन से जुड़े हुए कारणों की वजह से ही होती हैं" कहना है बाबी रमाकांत का जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक के पुरुस्कार प्राप्त सामाजिक कार्यकर्ता हैं.

"प्रति वर्ष लगभग ४० लाख से अधिक ५ साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु से बचाव मुमकिन है यदि पर्यावरण को संतुलित किया जाए, जिसमें स्वच्छ पानी और स्वच्छ हवा शामिल हैं" कहना है वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ गीता दयाल का.

"मुख्य पर्यावरण असंतुलन से होने वाली बीमारियाँ हैं - दस्त, श्वास सम्बन्धी संक्रमण, अनचाही चोट एवं मलेरिया. अच्छे पर्यावरण संतुलन से मलेरिया का मृत्यु दर ४० प्रतिशत कम हो सकता है, श्वास सम्बन्धी बीमारियों के मृत्यु दर में ४१ प्रतिशत गिरावट आ सकती है और दस्त का मृत्यु दर ९४ प्रतिशत कम हो सकता है" कहना है बाबी रमाकांत का. यही तीनों कारण बच्चों में सबसे बड़े मृत्यु के कारण हैं.

"तम्बाकू सेवन से भी लोगों को परहेज़ करना चाहिए क्योंकि तम्बाकू से न केवल व्यसनी पर जान लेवा कुप्रभाव पड़ता है बल्कि पर्यावरण को भी नुक्सान पहुँचता है" कहना है अमरीका के वेलेसले कॉलेज की अलेजन्द्रा एलिसन बरनी का।

"स्वस्थ्य पर्यावरण से कैंसर, हृदय सम्बन्धी बीमारियाँ, दमा या अस्थमा, श्वास सम्बन्धी बीमारियाँ, आदि से बचाव मुमकिन है" बाबी रमाकांत ने कहा.

"पर्यावरण असंतुलन से जनित बीमारियों एवं मृत्यु से बचाव मुमकिन है यदि हम लोग घर में स्वच्छ पीने के पानी को साफ़-सफाई से रखे, तम्बाकू का सेवन न करें, गुटखा से परहेज़ करें, साफ़ सफाई पर ध्यान दें और इंधन का प्रयोग किफायत से ही करें" कहना है प्रभा चतुर्वेदी का.

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