सतत विकास लक्ष्य एवं मासिक धर्म स्वच्छता

विश्वपति वर्मा, सिटीजन न्यूज सर्विस - सीएनएस 
भारत को सतत विकास लक्ष्य 2030 पूरा करने के लिये आम जनता, विशेषकर महिलाओं, के प्रजनन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है. इसकी एक महत्त्व पूर्ण कड़ी है मासिक धर्म स्वच्छता।  आज के परिवेश मे लड़कियों मे लगभग 12 वर्ष की आयु से माहवारी का सिलसिला शुरू  हो जाता है. माहवारी के दौरान सही जानकारी और उचित परामर्श ना मिलने से लड़कियों को अक्सर अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

कम उम्र में शादी जीवन की बरबादी

जितेंद्र कौशल सिंह, सिटिज़न न्यूज सर्विस - सीएनएस     
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं में उत्तरोत्तर प्रगति हुई है। जहां आजादी से पूर्व जीवन रक्षक दवाओं का मिलना ‎मुश्किल रहता था वहीं आज ग्रामीण क्षेत्रों में भी ब्लाक स्तर पर अच्छे स्वास्थ्य केन्द्र व मुफ्त एम्बुलेंस सुविधा भी उपलब्ध है। देश की स्वास्थ्य सेवाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन हुआ है। किन्तु महिला स्वास्थ्य सम्बन्धी कई आँकड़े अब भी चौंकाने वाले हैं.  जहां एक ओर हम आर्थिक उन्नति का दावा भरते हैं, वहीँ दूसरी ओर बाल-विवाह के मामले में शीर्ष 10 देशों में भारत भी शामिल है जोकि वैश्विक सतत विकास लक्ष्य को पूरा ‎करने में मूल बाधा नजर आती है।

७०वें नैटकान में टीबी और श्वास रोगों के नियंत्रण का आह्वान

सिटीजन न्यूज सर्विस - सीएनएस [English]
२१ फरवरी २०१६ को ७०वें टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों के राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन दिवस था.
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, राष्ट्रीय टीबी संगठन, और उत्तर प्रदेश टीबी संगठन के संयुक्त तत्वाधान में लखनऊ में २०-२१ फरवरी २०१६ के दौरान आयोजित हो रहा है ७०वां टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों पर राष्ट्रीय अधिवेशन (नैटकान).

सरकार ने २०३० तक टीबी समाप्त करने का वादा किया है: ७०वें नैटकान ने अपील की कि टीबी दर में गिरावट अधिक हो जिससे कि २०३० का लक्ष्य पूरा हो सके

सिटीजन न्यूज सर्विस [English]
भारत सरकार एवं दुनिया की अन्य सरकारों ने संयुक्त राष्ट्र की महासभा में पिछले वर्ष सतत विकास लक्ष्य २०३० को पारित किया है, जिनका लक्ष्य ३.३ है २०३० तक टीबी समाप्त करना. टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों के विशेषज्ञों ने ७०वें टीबी और श्वास रोगों पर राष्ट्रीय अधिवेशन (नैटकान), जिसका उद्घाटन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाएक ने किया, यह अपील की कि टीबी दरों में गिरावट तेज़ी से आये जिससे कि २०३० के लक्ष्य समय से या समय से पूर्व ही पूरे हो सकें. किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, राष्ट्रीय टीबी संगठन, और उत्तर प्रदेश टीबी टीबी के रोगियों की जांच जितनी शीघ्र हो सके उतनी जल्दी होनी चाहिए, समुदाय से जुड़ कर साथ में कार्यरत रहना चाहिए जिससे कि रोगी को अपना उपचार सफलतापूर्वक समाप्त करने में मदद मिले.

नैटकान से पूर्व ४ चिकित्सकीय कार्यशालाओं में १०० से अधिक विशेषज्ञों ने भाग लिया

सिटीजन न्यूज सर्विस, सीएनएस [English]
लखनऊ में होने वाले ७०वें टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों पर राष्ट्रीय अधिवेशन (नैटकान) से पूर्व, १०० से अधिक टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी विशेषज्ञों ने ४ चिकित्सकीय कार्यशालाओं में भाग लिया. यह ४ विशेष कार्यशालाएं इन मुद्दों पर केन्द्रित रहीं: टीबी (आधुनिक जांच, पुनरीक्षित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम, दवा प्रतिरोधक टीबी, नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन, स्लीप स्टडी, और पीऍफ़टी.

भारत में कैंसर दर (और मृत्युदर) १०% बढ़ा (२०११-२०१४): तंबाकू नियंत्रण एक बड़ी प्राथमिकता

[English] [Webinar recording] भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कैंसर के रोगियों की संख्या में और मृत्यु दर में लगभग १०% की बढ़ोतरी हुई है (२०११ और २०१४ के बीच). २०१४ में भारत में कैंसर के लगभग 44% रोगी मृत हुए. सीएनएस की निदेशक शोभा शुक्ला ने बताया कि "भारत में कैंसर रोगियों की संख्या २०११ में १०२८५०३ से बढ़कर 201४ में १११७२६९ हो गयी है. भारत में कैंसर द्वारा मृत्यु की संख्या भी २०११ में ४५२५४१ से बढ़कर २०१४ तक ४९१५९७ हो गयी है. कैंसर दर बढ़ने के अनेक कारण हैं जिनमें प्रमुख है तम्बाकू सेवन, असंतुलित आहार, जनसँख्या की आयुवृद्धि, और हानिकारक जीवनशैली."

यूपी में गैर-संक्रामक रोग कम होने के बजाय बढ़ोतरी पर

शोभा शुक्ला, सीएनएस निदेशक
[English] [सीएनएस फोटो] भारत ने विश्व के अन्य देशों के साथ, सितम्बर २०१५ में सतत विकास लक्ष्य २०३० को पारित किया था, जिनमें से एक लक्ष्य ३.४ है: रोकथाम, नियंत्रण और उपचार के द्वारा, गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु दर को २०३० तक १/३ कम करना. परन्तु यदि हम उत्तर प्रदेश के आंकड़ों के देखें तो प्रमुख गैर-संक्रामक रोगों की दर में कमी होने के बजाय बढ़ोतरी हो रही है. सीएनएस की निदेशक शोभा शुक्ला ने कहा कि "उत्तर प्रदेश को २०३० या उससे पहले सभी सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने चाहिए."

लखनऊ में होगा ७०वां टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों पर राष्ट्रीय अधिवेशन

सिटीजन न्यूज सर्विस, सीएनएस [English]
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, राष्ट्रीय टीबी संगठन, और उत्तर प्रदेश टीबी संगठन के संयुक्त तत्वाधान में लखनऊ में २०-२१ फरवरी २०१६ के दौरान आयोजित हो रहा है ७०वां टीबी और अन्य श्वास सम्बन्धी रोगों पर राष्ट्रीय अधिवेशन (नैटकान). १९ फरवरी २०१६ को एक-दिवसीय अधिवेशन से पूर्व ४ विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी. १० साल के पश्चात् नैटकान लखनऊ में आयोजित हो रही है (६० वां नैटकान अधिवेशन २००६ में संपन्न हुआ था).

२०३० सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में बाल विवाह एक बड़ी बाधा

बृहस्पति कुमार पाण्डेय, सिटीज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
वर्ष २००० में भारत समेत विश्व के 192 देशों ने सहस्त्रादि विकास लक्ष्य के अंतर्गत २०१५ ‎तक कुछ बडे लक्ष्यों को प्राप्त करने का वायदा किया था। इन लक्ष्यों में एक प्रमुख लक्ष्य था मातृ एवं नवजात ‎शिशु मृत्यु दर में कमी लाना। लेकिन उसको प्राप्त करने के लिए जो मानक तय किये गये ‎थे उन्हें प्राप्त करने में भारत समेत कई देश विफल रहे। ‎सितम्बर २०१५ में  संयुक्त राष्ट्र संघ के १९३ सदस्य देशों ने १७ सतत विकास लक्ष्यों ‎को पारित किया है जिन्हें वर्ष २०३० तक पूरा करने का समय निर्धारित किया गया है। तय किये गये १७  ‎लक्ष्यों के १६९ टार्गेट्स हैं जो इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगें। ‎

ग्रामीण परिपेक्ष्य में महिला और बाल स्वास्थ्य

मधुमिता वर्मा, सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस
यदि हम उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो कुपोषण, साफ़-सफाई का न  होना, अस्वच्छता, वायु एवं धुएं का प्रदूषण, खुले में शौच, अज्ञानता, उचित स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, आदि अनेक ऐसे कारण हैं  जिनके चलते ग्रामीण वासियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को अनेक प्रकार की बीमारियों को झेलना पड़ता है।

यौनिक शो‎षण- चुप्पी तोडनी ही होगी...

बृहस्पति कुमार पाण्डेय, सिटीजन न्यूज सर्विस ‎- सीएनएस 
फोटो क्रेडिट: सीएनएस 
देश में यौनिक एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुडी सामाजिक चुप्पी, भ्रम व मिथक की वजह से हर ‎रोज किशोर व युवा महिलाओं से जुडे यौन उत्पीडन के कई मामले सामने आते है। यह वह ‎मामले होते है जिसमें यौन उत्पीडन की शिकार महिला या तो पुलिस के पास शिकायत के ‎‎रूप में लेकर जाती है, या अत्यन्त जघन्य होने की दशा में ही सामने आ पाते है। लेकिन ‎ज्यादातर मामलों में यह देखा गया है कि यौनिक हिंसा की शिकार होने वाली महिला अपने ‎ऊपर होने वाले यौनिक अत्याचार को या तो चुपचाप सहती रहती है या परिवार के लोगों द्वारा ‎‎ऐसे मामलो को दबा दिया जाता है। ‎

वास्तविकता से इंकार क्यों ?

नीतू यादव, सिटीजन न्यूज़ सर्विस - सीएनएस 
जब हमारे भारतीय समाज में मानव शरीर से जुड़ी प्राथमिक आवश्यकताओं की बात की जाती है तो प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ रोटी, कपड़ा, और मकान का जिक्र करता है किन्तु   शरीर  के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य के विषय पर कोई भी  चर्चा नहीं करना चाहता, क्योंकि हमारे समाज में प्रारंभ से ही किशोर-किशोरियों को यह समझाया जाता है कि इस विषय पर चर्चा करना भी पाप है।  लैंगिक व प्रजनन स्वास्थ्य युवा पीढी से जुड़ा हुआ बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है.  अच्छे स्वास्थ्य के अभाव में  जीवन का आनंद कदापि नहीं उठाया जा सकता है। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारे समाज में इस विषय पर बात करना भी वर्जित है।

लैंगिक व प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों की सार्थकता

मधुमिता वर्मा, सिटिज़न न्यूज़ सर्विस - सीएनएस  
फोटो क्रेडिट: सीएनएस 
प्रजनन सृष्टि का मूल है, लैंगिक परिपक्वता के बिना प्रजनन की कल्पना नहीं की जा सकती है। परन्तु फिर भी हमारे देश में आज भी इस विचारधारा के लोगों की कमी नहीं जो लैंगिक व प्रजनन सम्बन्धी विषयों पर बात करना अपराध मानते हैं। यह संकीर्ण मानसिकता, लैंगिक व प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों के प्रचार-प्रसार में बाधक है। नवयुवक-नवयुवतियों में इसको लेकर एक प्रकार का भय व शर्म व्याप्त है जो उन्हें परेशानी होने पर भी छिपाए रहने के लिए बाध्य कर रहा है। यह स्थिति विकास के मार्ग में निश्चित रूप से एक बहुत बड़ी बाधा है।

एड्स को भारत में हुए ३० साल: उत्तर प्रदेश में एड्स नियंत्रण में सफलताएँ परन्तु चुनौतियाँ बरक़रार

[English] ३० साल पहले १९८५ में भारत में जब पहले एचआईवी पोसिटिव व्यक्ति की जांच पक्की हुई, तब चंद चिकित्सकों में जो सर्वप्रथम आगे आये और एचआईवी पोसिटिव लोगों की देखभाल आरंभ की, वो थे डॉ इश्वर गिलाडा, अध्यक्ष, एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (एएसआई).डॉ गिलाडा लखनऊ में १५ दिसम्बर को संजय गाँधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में हुए सेमिनार 'भारत में एड्स को हुए ३० साल: सफलताएँ पर चुनौतियाँ बरकरार' में मुख्य वक्ता थे. यह सेमिनार, एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट, एएसआई, पीपल्स हेल्थ आर्गेनाइजेशन और सीएनएस द्वारा एसजीपीजीआई में आयोजित किया गया था.

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए वैश्विक सतत विकास लक्ष्य २०३० के क्या मायने हैं?

बाबी रमाकांत, सिटीजन न्यूज़ सर्विस (सीएनएस)
भारत सरकार ने २ माह पहले दुनिया की अन्य सरकारों के साथ, संयुक्त राष्ट्र की ७०वीं महासभा में वैश्विक सतत विकास लक्ष्य २०३० को पारित तो कर दिया, पर क्या हम इन लक्ष्यों की ओर तेज़ी से प्रगति कर रहे हैं या पीछे जा रहे हैं? उदहारण के तौर पर, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में मातृत्व मृत्यु दर ९२ प्रति १००,००० जीवित-शिशु जन्म है. वैश्विक सतत विकास लक्ष्य ३.१ के अनुसार २०३० तक मातृत्व मृत्यु दर ७० प्रति १००,००० जीवित शिशु जन्म से कम होना है।

विश्व एड्स दिवस पर विशेष: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में एड्स नियंत्रण में प्रगति, पर चुनौतियाँ बरकरार

बाबी रमाकांत, सिटीजन न्यूज सर्विस (सीएनएस)
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना प्रदेशों में देश केअन्य सभी प्रदेशों की तुलना में, सबसे अधिक एचआईवीके साथ जीवित लोग हैं, १.७ लाख. भारत में कुल नए एचआईवी संक्रमण में से आधे ४ प्रदेशों में होते हैं: आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तामिल नाडू और कर्नाटक।

विश्व पाइल्स (बवासीर) दिवस: बवासीर की जल्दी जांच और सही इलाज होना जन स्वास्थ्य प्राथमिकता है

विश्व पाइल्स (बवासीर) दिवस २० नवम्बर २०१५ के उपलक्ष्य में, इंदिरा नगर के सी-ब्लाक चौराहा स्थित पाईल्स तो स्माइल्स केंद्र में प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने नि:शुल्क कैंप लगाया जहाँ अनेक मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श मिला, और कुछ दवाएं भी वितरित की गयीं. किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के पुर्व प्रमुख प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि “पाइल्स/ बवासीर और अन्य ऐसे रोग जैसे कि फिस्टुला आदि लोग शर्म के कारण सही इलाज देरी से कराते हैं जब तक समस्या गंभीर रूप ले लेती है और अन्य सम्बंधित-रोग भी हो सकते हैं. इसीलिए जरुरी है कि जागरूकता बढ़े और लोग पहले लक्षण में ही सही जांच और सही इलाज करवाएं.”

विश्व मधुमेह दिवस पर भारत टीबी-मधुमेह सम्बंधित बाली-घोषणापत्र को समर्थन दे: अपील

स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार से अपील की है कि आगामी विश्व मधुमेह दिवस १४ नवम्बर को बाली-घोषणापत्र को अपना समर्थन दे कर, टीबी और मधुमेह के सह-महामारी को रोकने के प्रयासों में तेज़ी लाये. इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बाली-घोषणापत्र को समर्थन दे कर दोनों महामारियों के नियंत्रण के प्रति अपना मत दिया है. सीएनएस स्वास्थ्य को वोट अभियान की वरिष्ठ सलाहकार शोभा शुक्ला ने कहा कि "भारत समेत सभी देश जहां टीबी और मधुमेह दोनों एक महामारी का प्रकोप लिए हुए हैं, उनको चाहिए कि बाली घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करें और टीबी और मधुमेह कार्यक्रमों में सक्रीय तालमेल बिठाएं. भारत में विश्व में सबसे अधिक टीबी के रोगी हैं और मधुमेह भी महामारी के रूप में स्थापित है, इसीलिए दोनों कार्यक्रमों में भी समन्वय होना आवश्यक है."

टीबी, मलेरिया, डेंगू और काला अजार के नियंत्रण के लिए शोध में निवेश

डॉ बीटी स्लिंग्सबी
जीएचआईटी-फण्ड
[English] टीबी, मलेरिया, डेंगू और काला अजार के प्रभावकारी नियंत्रण और अंतत: उन्मूलन के लिए शोध कार्य में, जापान के ग्लोबल हेल्थ इनोवेटिव टेक्नोलॉजी फण्ड (जीएचआईटी-फण्ड) ने अमरीकी डालर १०.७ मिलियन का निवेश किया है. जीएचआईटी-फण्ड के निदेशक डॉ बीटी स्लिंग्सबी ने सीएनएस को साक्षात्कार में बताया कि जीएचआईटी-फण्ड पिछले ढाई साल से इन रोगों से सम्बंधित शोध कार्य में निवेश कर रहा है. टीबी और मलेरिया की दवाएं बेअसर होती जा रही हैं क्योंकि दवा प्रतिरोधकता बढ़ रही है. उदाहरण के तौर पर, ग्रेटर-मेकोंग सब-रीजन जो दक्षिण पूर्वी एशिया का क्षेत्र है, वहाँ दवा प्रतिरोधक मलेरिया का प्रकोप है. डेंगू का भी प्रकोप बढ़ रहा है. ७० साल बाद जापान में २ साल पहले डेंगू महामारी फैली थी. इन रोगों से निजात पाने के लिए आवश्यक है कि हमारे पास अधिक प्रभावकारी जांच, वैक्सीन और दवाएं हों, इसीलिए हम इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं.

पाईल्स (बवासीर) चिकित्सकीय मानक दिशानिर्देशों को सभी स्वास्थ्यकर्मी अपनाएं

प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त आपरेशन-कक्ष में
[वेबिनार रिकॉर्डिंग] ५० वर्ष से अधिक लोगों में ५०% से अधिक को कम-से-कम एक बार पाईल्स या बवासीर सम्बंधित समस्या का सामना करना पड़ता है. इसके बावजूद भी पाईल्स या बवासीर चिकित्सकीय प्रबंधन के मानक दिशानिर्देश नहीं हैं कि सभी चिकित्सकीय विशेषताओं के स्वास्थ्यकर्मी वैज्ञानिक रूप से स्थापित मानकों से ही पाईल्स या बवासीर का इलाज करें. हर सर्जन या फिजिशियन अपने संज्ञान से उत्तम इलाज करता है. पाईल्स या बवासीर के उपचार सम्बन्धी मानक दिशानिर्देश आवश्यक हैं" कहना है किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त का, जो वर्त्तमान में पाईल्स तो स्माइल्स के संस्थापक-निर्देशक हैं.