तम्बाकू उत्पादनों पर फोटो वाली चेतावनी हुई कमजोर

तम्बाकू उत्पादनों पर फोटो वाली चेतावनी हुई कमजोर

४ मई २००९ के सरकारी अधिसूचना के अनुसार तम्बाकू उत्पादनों पर फोटो वाली चेतावनी और भी अधिक कमजोर कर दी गई है. भूतपूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ अंबुमणि रामादोस ने २ मई २००९ को समाचार पत्रों के माध्यम से कहा था कि उन्हें अंदेशा है कि मंत्रियों के समूह ने ३ फरवरी २००९ की बैठक के मिनट उनके इस्तीफे के बाद परिवर्तित कर दिए हैं.

डॉ रामदोस का अंदेशा सही था क्योंकि १५वीं लोक सभा चुनाव के दौरान जब अंचार संहिता लागु है, तब मंत्रियों के समूह ने सभवत: ३ फरवरी २००९ की बैठक के मिनट को परिवर्तित कर दिया है और फोटो वाली चेतावनी तम्बाकू उत्पादनों पर ४० प्रतिशत से घटा कर २० प्रतिशत एक तरफ़ कर दी है और जो तम्बाकू उत्पादन विक्रय केन्द्र के लिए नहीं हैं, उनको फोटो वाली चेतावनी लगाने से छूट दे दी गई है.

हमें उम्मीद है कि चुनाव आयोग इस बात को नज़रंदाज़ नहीं करेगा क्योंकि स्वास्थय नीतियों के कमजोर करने के पीछे संभवत: राजनीतिक कारण लगते हैं. उदाहरण के लिए मंत्रियों के समूह के अध्यक्ष प्रणब मुख़र्जी के चुनाव छेत्र मुशीराबाद में बीड़ी उत्पादकों की आबादी है।

पहले भी मंत्रियों के समूह ने ८ अप्रैल २००९ को मिलने का प्रयास किया था पर लोगों का अनुमान है कि चुनाव आयोग ने इसकी संस्तुति नहीं दी थी. पर यह किसी ने भी नहीं अनुमान लगाया था कि मंत्रियों का समूह डॉ रामदोस के इस्तीफे के बाद आसानी से ३ फरवरी २००९ के मिनट ही परिवर्तित कर देगा.

सन २००७ से तम्बाकू उत्पादनों पर फोटो वाली चेतावनी लगाने की अधिसूचना को लागु करने में २ साल से अधिक की देरी हो चुकी है. इस दौरान इस स्वास्थ्य नीति को बारम्बार कमजोर किया गया है, जैसे कि तम्बाकू उत्पादनों के ५० प्रतिशत भाग पर चेतावनी प्रकाशित करने से घटा कर ४० प्रतिशत और अब २० प्रतिशत एक ओर कर दिया गया है.

यह अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण संधि का भी उलंघन है जिसको भारत ने भी पारित किया हुआ है. इसके अनुसार तम्बाकू उत्पादनों के दोनों ओर कम से कम ३० प्रतिशत फोटो वाली चेतावनी होनी चाहिए - कुल मिला कर ६० प्रतिशत ... और अब भारत में तम्बाकू उत्पादनों का मात्र ४० प्रतिशत भाग ही चेतावनी के लिए निर्धारित किया गया है.

शोध के अनुसार तम्बाकू उत्पादनों पर फोटो वाली चेतावनी से तम्बाकू का सेवन करने वाले लोगों में तम्बाकू जनित जान-लेवा बीमारियों के सम्बन्ध में जानकारी बढ़ती है, उनके तम्बाकू नशा त्यागने की सम्भावना बढ़ती है, और तम्बाकू के नए सेवन करने वाले युवकों की संख्या में भी गिरावट आती है.

बाबी रमाकांत
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक द्वारा पुरुस्कृत कार्यकर्ता (२००८)

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