अप्रत्यक्ष विज्ञापनों के जरिये तम्बाकू कम्पनियां बढ़ा ही हैं अपना बाजार

'तम्बाकू एक धीमा जहर है.  चाहे वह जिस रूप में ली जाए उसका  परिणाम घातक ही होता है' यह कहना है छत्रपति शाहूजी महाराज चिकित्सा विश्वविद्यालय के सर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो0 (डा0) रमाकांत का।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरूस्कार 2005 द्वारा पुरूस्कृत प्रो0 (डा0) रमाकांत ने कहा कि जो व्यक्ति तम्बाकू का किसी न किसी रूप में सेवन करते हैं, उनमें से ५०% की मृत्यु का कारण तम्बाकू है। तम्बाकू का हानिकारक प्रभाव न सिर्फ उसके उपयोग करने वाले पर पड़ता है, बल्कि उपयोग कर्ता के साथ में रहने वाले व्यक्ति पर भी इसका बुरा असर पड़ता है, यहां तक कि अगर गर्भवती महिला के सामने कोई धूम्रपान कर रहा हो तो उसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी पड़ता है, और वह मंदबुद्धि, अपंगता, हृदय रोग जैसी बीमारियों का शिकार हो सकता है।

एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इण्डिया  2012 के नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रो0 (डा0) रमाकांत ने तम्बाकू से जुड़े दुष्प्रभावों के बारे में बताने के साथ ही स्लाइड के माध्यम से तम्बाकू की चपेट में आए मरीजों की फोटो दिखाकर यह बताया कि किस प्रकार तम्बाकू की वजह से उन्हें मुंह का कैंसर, हाथ व पांव में अपंगता, मुंह का न खुलना  आदि जैसी गंभीर बीमारियों से जूझते हुए अपनी जान गँवानी पड़ी।

वर्तमान में सी ब्लॉक इन्दिरा नगर में ‘पाइल्स टू स्माइल’ नामक क्लीनिक के निदेशक प्रो0 (डा0) रमाकांत ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा क़ि यह कोई जरूरी नही है कि जो लोग रोज तम्बाकू का सेवन करें उन्हें ही कोई बीमारी हो, कभी कभी चखने वाले भी इसकी चपेट में आ सकतें हैं।

बॉबी रमाकांत ने बताया कि किस प्रकार तम्बाकू कम्पनियां ‘सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम 2003’ के लागू होने के बाद सीधे प्रचार प्रसार न करके दूसरे उत्पादों की आड़ में अपना प्रचार कर रही हैं. उन्होने एक सिगरेट बनाने वाली कम्पनी गोडफ्रे फिलिप्स का उदाहरण देते हुए बताया कि  उसने भारत के कुछ नागरिकों को उनकी बहादुरी को सम्मानित करते हुए अवार्ड दिया, अर्थात परोक्ष रूप  से ही  सही, वे सिर्फ अपना प्रचार करना चाहती हैं। यदि वास्तव में उनके दिल में उन लोगों के लिये सम्मान है जिन्होनें अपनी बहादुरी से दूसरों की जान बचाई तो वह खुद क्यों ऐसे उत्पाद बनाकर बेच रही है जिनसे प्रतिदिन लाखों लोग मर रहे हैं? इसी प्रकार उन्होंने और भी कई सारी कंपनियों के परोक्ष विज्ञापनों के बारे में बताया।

बॉबी रमाकांत ने तम्बाकू के प्रचार के बारे में बताने के साथ ही  ’दर्पण (2006)’ नामक एक डाक्युमेंटरी फिल्म दिखाई जिसमें उन्होने दिखाया कि किस प्रकार दूसरे उत्पादों का सहारा लेकर यह कम्पनियां तम्बाकू उत्पाद बेच रही हैं।

(प्रस्तुत लेखक सी.एन.एस. द्वारा आयोजित छः दिवशीय  "अधिकार व दायित्व "  शिविर में प्रशिक्षित एक प्रशिक्षार्थी नदीम सलमानी द्वारा  लिखा गया हैं)

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