तंबाकू नियंत्रण, चुनौती - दैनिक भास्कर

तंबाकू नियंत्रण, चुनौती

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toन केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में तंबाकू नियंत्रण एक गंभीर चुनौती है। तंबाकू के सेवन को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विज्ञापनों के जरिये ग्लैमर, जीवन शैली और ‘प्रगतिशील’ छवि से जोड़ते हुए इसके बाजार को बढ़ाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ‘वल्र्ड हैल्थ स्टेटिस्टिक 2008’ ने भी तंबाकू से होने वाली बीमारियों को एक गंभीर चुनौती माना है। इस रपट के अनुसार 60 लाख से भी अधिक लोग तंबाकू जनित कारणों से प्रतिवर्ष मृत्यु को प्राप्त होते हैं। भारत में यह दर प्रतिवर्ष 10 लाख लोगों की है।

गौरतलब है कि भारत में तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 में प्रभावकारी तंबाकू नियंत्रण के लिए सभी नीतियां हैं परंतु इसको लागू करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. अंबुमणि रामदास सालों से जूझ रहे हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि तंबाकू नियंत्रण नीतियों को आखिर हम कैसे लागू करेंगे?

जरूरत है आम लोगों को जागरूक करने की और इन नीतियों को लागू करने में शामिल करने की। आम जनता में न केवल तंबाकू के स्वास्थ्य पर पड़ रहे कुप्रभावों के बारे में, बल्कि तंबाकू नियंत्रण नीतियों के बारे में भी सूचना या जानकारी काफी कम है। इस अधिनियम के तहत फिल्मों में भी तंबाकू सेवन को प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध है। हालांकि तंबाकू उद्योग फिल्मों में तंबाकू सेवन को प्रदर्शित करने को अत्यंत गंभीरता से लेता है क्योंकि उद्योग यह जानता है कि बच्चे और युवाओं के रूप में नए ग्राहक बनाने का यह सबसे प्रभावकारी जरिया है।

पिछले ही दिनों डॉ. रामदास ने घोषणा की कि अक्टूबर 2008 से कार्यस्थल पर तंबाकू सेवन प्रतिबंधित हो जाएगा। सार्वजनिक स्थानों पर पहले से ही धूम्रपान प्रतिबंधित है, परंतु ये नीतियां कितनी गंभीरता से लागू की जा रही हैं, यह चिंता का विषय है। सफलतापूर्वक तंबाकू नशा त्यागना असंभव तो नहीं परंतु इतना सरल भी नहीं। करोड़ों लोग जो भारत में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं, जिनमें कई प्रशासनिक अधिकारी, नेतागण और चिकित्सक तक शामिल हैं, कैसे कार्यस्थल पर और सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू से दूर रहेंगे?

इस नीति को लागू करने के लिए सबसे अधिक आवश्यकता है कि लोग तंबाकू के स्वास्थ्य पर कुप्रभावों के प्रति जागरूक हों और उन्हें तंबाकू नशा उन्मूलन के लिए सहायता एवं परामर्श आसानी से उपलब्ध हो।

पूरे भारत में करोड़ों की संख्या में किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करने वालों के लिए 100 से अधिक तंबाकू नशा उन्मूलन क्लीनिक भी उपलब्ध नहीं हैं। बिना किसी आर्थिक खर्च के हर स्वास्थ्य केंद्र पर मौजूदा स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण द्वारा तंबाकू नशा उन्मूलन की सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। जब ऐसा हो तो संभवतया कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध को अधिक प्रभावकारी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

तंबाकू नियंत्रण नीतियों को एकाकी ढंग से नहीं देखना चाहिए क्योंकि सामाजिक न्याय, विकास और जन स्वास्थ्य नीतियों का यह एक महत्वपूर्ण भाग है। तंबाकू नियंत्रण अन्य रोगों से भिन्न है क्योंकि यह सिर्फ स्वास्थ्य का मसला नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय का मसला है जहां तंबाकू उद्योग इस ‘धीमे जहर’ के बाजार को बचाने और बढ़ाने के लिए पूरी तरह समर्पित है।-

लेखक नेशनल एलांयस ऑफ पीपुल्स मूवमेंट और तंबाकू विरोधी अभियान से जुड़े हैं।

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