क्या तम्बाकू एवं शराब कम्पनियाँ अप्रत्यक्ष विज्ञापन बंद करेंगी?

क्या तम्बाकू एवं शराब कम्पनियाँ अप्रत्यक्ष विज्ञापन बंद करेंगी?

भारतीय कानून के अनुसार शराब और तम्बाकू के अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर बंदी लगी हुई है. परन्तु कई तम्बाकू एवं शराब कंपनियों ने अपने तम्बाकू या शराब उत्पादन के ब्रांड को अन्य उत्पादन (गैर तम्बाकू और शराब) को भी दे के अप्रत्यक्ष विज्ञापन को बढावा दिया है.

अप्रत्यक्ष विज्ञापन तब होता है जब किसी अन्य उत्पादन का वही ब्रांड हो जो किसी जाने-माने उत्पादन का है. जैसे कि रोयाल चैलेन्ज, एक शराब का ब्रांड है, पर सोनी टी.वी. पर इसकी एक खेल-सीरीज़ भी आती है. अधिकांश लोग जब रोयल चैलेन्ज पढेंगे तो शराब से संबंधित करेंगे न कि खेल से. रोयाल चैलेन्ज इंडियन प्रेमिएर लीग मैच को प्रायोजित करती रही हैं सोनी टी.वी. पर. इसी का फायदा ये कम्पनियाँ उठाती हैं और जिन उत्पादनों का विज्ञापन कानूनन बंद है, उनको बढावा देती हैं.

इसी तरह किन्ग्फिशेर एअरलाइन बाद में आई और किन्ग्फिशेर शराब पहले से ही स्थापित ब्रांड थी. इंडियन तोबक्को कंपनी या आई.टी.सी. ने अपने ब्रांड विल्स सिगरेट के ब्रांड से ही रेडीमेड कपडों की दुकानें खोल दी हैं. अधिकांश युवाओं के लिए विल्स तम्बाकू है न कि जन्घिये-बनियान!

ये शोध द्वारा प्रमाणित हो चुका है कि तम्बाकू एवं शराब के विज्ञापन बंदी पर रोक लगाना जन-हित में है, देश के हित में है, जन-स्वास्थ्य के हित में है.

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