निमंतरण: ७वां जन-आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) का राष्ट्रीय अधिवेशन

निमंतरण
७वां जन-आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) का राष्ट्रीय अधिवेशन

National Alliance of People's Movements (NAPM)
या
जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय


7वां जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय का द्वि-वार्षिक अधिवेशन

स्थान: कुशीनगर, उत्तर प्रदेश (उप)

तिथि: ७ - ८ जून २००८

प्रिये साथियों,

जिन्दाबाद.
जैसा कि आपको ज्ञात होगा कि जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (napm यासमन्वय’) भारत के विभिन्न प्रदेशों में चल रहे जीवन और रोज़गार के अधिकार के लिए जन-आन्दोलनों को जोड़ता हुआ और वैकल्पिक उर्जा, पानी और कृषि के तरीकों को बढावा देने वालों को एक जुट करता हुआ स्थापित हुआ है.

समन्वयने पिछले सालों में देश-भर में चल रहे अनेकों संघर्षों को मजबूत किया है, जोडा है और लोगों को जागरूक करने का सतत प्रयास किया है कि अधिकांश लोगों के हितों को नज़रंदाज़ करके चंद धनाढ्य और शक्तिशाली लोगों के मुनाफे के लिए किस तरह देश काविकासकिया जा रहा है.

हमें इस बात का अंदेशा है कि स्थिति दिन-बार-दिन और भी अधिक बिगड़ती जा रही है भले ही कोई भी राजनितिक पार्टी प्रदेश में या देश में साशन कर रही हो.

हकीकत ये है कि:

- ये चंद धनाढ्य लोग जब ‘जबरदस्त’ विकास का ड्रम पीट रहे होते है, वही असलियत में ये ‘विकास’ रोज़गार-रहित होता है और अधिकांश लोगों के रोज़गार के माध्यम अधिक सीमित और तंग होते जा रहे हैं.

- कृषि छेत्र बरबाद हो रहा है और विश्व के आर्थिक संस्थानों से और बहु-राष्ट्रीय उद्योगों से श्रम कानून लोगों के हितों की संग्रक्षा करने में असमर्थ है.

- सब बुनियादी सेवाएं जैसे कि पानी, बिजली, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा, सड़क-मार्ग, रेल, पोर्ट, जन परिवहन के माध्यम है, या तो निजी कंपनियों को दिए गए हैं या तेज़ी से दिए जा रहे हैं. इस प्रक्रिया में जो लोगों के संसाधन थे, उनपर सबसे क्रूरता से कु-प्रभाव पड़ रहा है.

सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक कट्ठ्रपंथी विचारों को बढावा देना आदि के पनपने से जो सामाजिक माहौल है वो और भी अधिक बिगड़ता जा रहा है.

जो लोगों पर ढाया जा रहा है, उसको विकास का आतंकवादकहा जा सकता है – और इससे कु-प्रभावित हो रहे हैं गरीब किसान, मछ्छुँरे, आदिवासी, दलित, और अन्य मजदूर वर्ग.

भले ही वो हो नंदीग्राम, सिंगुर, कालीनगर, अयोध्या, पोस्को (POSCO), गोरे, प्लाचीमाडा, चेंगारा, या हो काकिनाडा, अत्यन्त क्रूर हिंसा का उपयोग किया जाता है लोगों को विस्थापित करने के लिए, उनके संसाधन आदि छीनने के लिए, उनको बेरोजगार करने के लिए और इससे सो लोकतांत्रिक जगह थी समाज में न्याय के लिए और आन्दोलन के लिए वो भी नष्ट होती जा रही है. जो भी इस ‘विकास’ के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसपर ‘विकास-विरोधी’, ‘राष्ट्र-विरोधी’, ‘नक्सल’, ‘विदेशियों का साथी’ आदि का लेबल चपका दिया जाता है.

इस परिपेक्ष में ये और भी अधिक ज़रूरी हो जाता है कि भार्तिये संविधान में आर्टिकल २४३ को मजबूत किया जाए जिसके तहत सामाजिक विकास का ढांचा रखा गया है (जिससे ‘विकास’ के नाम पर स्पेशल इकनॉमिक ज़ोन (SEZ) का जो तमाशा चल रहा है, और लोगों के संसाधनों का और अधिकारों का पतन हो रहा है, उस पर बंदिश लगे) और गावं के स्तर पर ग्राम सभा और वार्ड कमिटी को विकास योजना बनाने के लिए केंद्रीय भूमिका लेने का आह्वान है.

इसी परिवेश में, जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समंवाए (napm) अपना ७वां द्वि-वार्षिक अधिवेशन आयोजित कर रहा है और आप सबको सादर आमन्त्रित कर रहा है. जो लोग लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, धर्म-निरपेक्षता और बराबरी के लिए संघर्ष करना चाहते हैं, वो सब आमन्त्रित हैं.

सधन्यवाद,

अरुंधती दुरु, संदीप पाण्डेय, मेधा पाटकर
सर. सलिया, डी. गब्रिएला, . चेंनिः
आनंद मज्गओंकर, थॉमस कोचेर्री, अरुण रोय
संजय मग, उल्का महाजन, मुक्त श्रीवास्तव
गीता रामकृष्णन, पीटी हुसैन, उमा शंकरी
सुभाष वारे, नब कोहली, अमरनाथ भाई

आगे के कार्यक्रम की जानकारी आदि के लिए सम्पर्क करें:

केशव: ०९८३९८८३५१८, ईमेल: napmup@gmail.com
नन्दलाल मास्टर: ०९४१५३००५२०
उधय बहन: ०९९३५४४५४८९
मुक्त: ०९९६९५३००६०
अन्य ईमेल: napmindia@gmail.com, mumbainapm@gmail.com
सिम्प्रीत: ०९९६९३६३०६५

1 comment:

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