तपेदिक या टीबी समाचार, १९ अप्रैल 2008

तपेदिक या टीबी समाचार
19 अप्रैल
२००८


नई दिल्ली से अमरीका तक की यात्रा में हवाई-जहाज में सवार एक महिला जो अमरीकी है और जिसकोमुल्टी-ड्रग रेसिस्तंत टीबी या
ऍम.डी.आर. टीबी थी, ने खलबली मचा दी थी। जब ये ज्ञात हुआ कि ऍम.डी.आर. टीबी से ग्रसित ये महिला हवाई यात्रा कर के आई है, तो अमरीका में अन्य हवाई-जहाज के यात्रियों को सम्पर्क किया गया और स्वास्थ्य विभाग और कोर्ट के आदेश से जबरन टीबी की आंच की गई। इनमे से एक को टीबी निकल आई है।
जरा सोचें कि अमरीका टीबी नियंत्रण के लिए जो करता है और बाकि विकसित देश भी जिस तरह से गंभीरता से रोक्द्हम का प्रयास कर रहे हैं, वो विकासशील देशों में मुमकिन है ही नही। विकासशील देशों में भीड़-भाड़ से बचना मुमकिन है ही नही और इस तरह सब यात्रियों को खोज खोज के जांच करना आदि भी मुमकिन नही। नि:संदेह ये समाधान नही है टी.बी नियंत्रण का।

अमरीका के न्यू मेक्सिको में एक स्वास्थ्य कर्मचारी को टीबी निकल आई। अब २५० से अधिक मरीज और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी जो इस टीबी संक्रमित कर्मचारी के सम्पर्क में थे, उन सब की जांच हो रही है।

कुवैत ने ग्लोबल फंड टू फाइट एड्स, टीबी और मलेरिया को ५००,०० अमरीकी डालर अनुदान दे के एक मिसाल कायम की है। अन्य विक्सित और विकासशील देशों को अपने बजट से मुनासिब धनराशी एड्स, टीबी और मलेरिया की रोक्धाम के लिए समर्पित करनी चाहिए तभी ये कार्यक्रम स्थायी होंगे और कुछ नतीजे निकल के आयेंगे।

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